शुक्र ग्रह
Shukra (Venus) · 11 अक्टूबर 2026
वर्तमान गोचर
| ग्रह | शुक्र |
|---|---|
| राशि | तुला |
| अंश | 13.1° |
| गति | वक्री |
| इस राशि में | 3 सित॰ 2026 से |
| अगला परिवर्तन | कन्या राशि में 7 नव॰ 2026 से |
| इस राशि में गरिमा | स्वराशि |
शुक्र किसके कारक हैं
शुक्र शुभ ग्रह — सुख व रस का कारक हैं और शास्त्र में इन्हें दांपत्य, सौंदर्य, कला, वाहन, सुख-सुविधा व भोग का कारक कहा गया है। ये लगभग एक माह प्रति राशि की गति से चलते हैं।
इस समय तुला राशि में होने से ये स्वराशि में हैं — यह ग्रह अपनी ही राशि में है — पूर्ण बल के साथ स्वाभाविक व स्थिर फल देता है।
शुक्र के नक्षत्र
विंशोत्तरी पद्धति में शुक्र इन तीन नक्षत्रों के स्वामी हैं — जिस जातक का जन्म-नक्षत्र इनमें हो, उसकी महादशा शुक्र से आरंभ होती है।
शुक्र महादशा
विंशोत्तरी महादशा में शुक्र की अवधि 20 वर्ष है (कुल 120 वर्ष के चक्र में)। महादशा का फल ग्रह के बल, भाव-स्वामित्व व गोचर तीनों पर निर्भर करता है — केवल अवधि से नहीं।
शुक्र बीज मंत्र, उपाय व दान
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
दान: श्वेत वस्त्र, चावल, मिश्री व चाँदी — शुक्रवार को।
उपाय: शुक्रवार को माँ लक्ष्मी की आराधना व श्वेत वस्तुओं का दान।
सभी राशियों पर फल
शुक्र के तुला गोचर का सभी 12 राशियों पर शास्त्रीय फल देखें — शुभ, मध्यम व सावधानी सहित।
संबंधित पाठ व पर्व
- माँ लक्ष्मी — सभी पाठ — देवता
- ॐ जय लक्ष्मी माता — आरती — आरती
- श्री लक्ष्मी चालीसा — चालीसा
- कनकधारा स्तोत्र — स्तोत्र
- शुक्रवार की उपासना — वार
व्यक्तिगत फल
शुक्र ग्रह का आपकी कुंडली पर फल व उपाय जानने हेतु ज्योतिष आचार्य से पूछें।