जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे (सर्वरूप भगवान् आरती)

भगवान विष्णु · Vishnu · आरती

जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे (सर्वरूप भगवान् आरती) — भगवान विष्णु

जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे (सर्वरूप भगवान् आरती) के बोल

जय जगदीश हरे, प्रभु ! जय जगदीश हरे।
मायातीत, महेश्वर मन-वच-बुद्धि परे॥
आदि, अनादि, अगोचर, अविचल, अविनाशी।
अतुल, अनन्त, अनामय, अमित, शक्ति-राशी॥ १॥ जय०
अमल, अकल, अज, अक्षय, अव्यय, अविकारी।
सत-चित-सुखमय, सुन्दर शिव सत्ताधारी॥ २॥ जय०
विधि-हरि-शंकर-गणपति-सूर्य-शक्तिरूपा।
विश्व चराचर तुम ही, तुम ही जगभूपा॥ ३॥ जय०
माता-पिता-पितामह-स्वामि-सुहृद भर्ता।
विश्वोत्पादक पालक रक्षक संहर्ता॥ ४॥ जय०
साक्षी, शरण, सखा, प्रिय, प्रियतम, पूर्ण प्रभो।
केवल-काल कलानिधि, कालातीत, विभो॥ ५॥ जय०
राम-कृष्ण, करुणामय, प्रेमामृत-सागर।
मन-मोहन मुरलीधर, नित-नव नटनागर॥ ६॥ जय०
सब बिधि हीन, मलिन-मति, हम अति पातकि-जन।
प्रभुपद-विमुख अभागी, कलि-कलुषित तन-मन॥ ७॥ जय०
आश्रय-दान दयार्णव! हम सबको दीजै।
पाप-ताप हर हरि! सब, निज-जन कर लीजै॥ ८॥ जय०

जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे (सर्वरूप भगवान् आरती) — कब पढ़ें

भगवान विष्णु की आराधना का दिन गुरुवार है — अगला गुरुवार, 20 अगस्त को।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।

गुरु की वर्तमान स्थिति

गुरु इस समय कर्क राशि में हैं, और 31 अक्टू॰ 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।

ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।

अगला संबंधित व्रत

भगवान विष्णु से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।

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