श्रीबदरीनाथाष्टकम् — भू-बैकुण्ठकृतावासं
भगवान विष्णु · Vishnu · स्तोत्र
श्रीबदरीनाथाष्टकम् — भू-बैकुण्ठकृतावासं के बोल
भू-बैकुण्ठकृतावासं देवदेवं जगत्पतिम्।
चतुर्वर्गप्रदातारं श्रीबद्रीशं नमाम्यहम्॥ १॥
तापत्रयहरं साक्षाच्छान्तिपुष्टिबलप्रदम्।
परमानन्ददातारं श्रीबद्रीशं नमाम्यहम्॥ २॥
सद्यः पापक्षयकरं सद्यः कैवल्यदायकम्।
लोकत्रयविधातारं श्रीबद्रीशं नमाम्यहम्॥ ३॥
भक्तवाञ्छाकल्पतरुं करुणारसविग्रहम्।
भवाब्धिपारकर्तारं श्रीबद्रीशं नमाम्यहम्॥ ४॥
सर्वदेवनुतं शश्वत् सर्वतीर्थास्पदं विभुम्।
लीलयोपात्तवपुषं श्रीबद्रीशं नमाम्यहम्॥ ५॥
अनादिनिधनं कालकालं भीमयमच्युतम्।
सर्वाश्चर्यमयं देवं श्रीबद्रीशं नमाम्यहम्॥ ६॥
गन्धमादनकूटस्थं नरनारायणात्मकम्।
बदरीखण्डमध्यस्थं श्रीबद्रीशं नमाम्यहम्॥ ७॥
शत्रूदासीनमित्राणां सर्वज्ञ समदर्शिनम्।
ब्रह्मानन्दचिदाभासं श्रीबद्रीशं नमाम्यहम्॥ ८॥
श्रीबदरीनाथाष्टकम् — भू-बैकुण्ठकृतावासं — कब पढ़ें
भगवान विष्णु की आराधना का दिन गुरुवार है — अगला गुरुवार, 15 अक्टूबर को।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
गुरु की वर्तमान स्थिति
गुरु इस समय कर्क राशि में हैं, और 31 अक्टू॰ 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।
ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।
अगला संबंधित व्रत
भगवान विष्णु से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, गुरुवार, 22 अक्टूबर (13 दिन बाद)।
भगवान विष्णु मंत्र जप की विधि
जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; भगवान विष्णु की आराधना का वार गुरुवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
माला: **तुलसी** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।
जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।