भगवान विष्णु की आरती, मंत्र, चालीसा व भजन
Vishnu
भगवान विष्णु के बारे में
भगवान विष्णु हिंदू धर्म के परम पूज्य देव हैं और असंख्य भक्त श्रद्धा से इनकी आराधना करते हैं। जगत के पालनहार भगवान श्री हरि चतुर्भुज धारी। नीचे भगवान विष्णु की समस्त आरती, चालीसा, मंत्र, स्तोत्र एवं भजन — अर्थ सहित — दिए गए हैं, जिन्हें आप पढ़ सकते हैं, सुन सकते हैं तथा PDF रूप में सहेज सकते हैं। नित्य भगवान विष्णु की आरती व मंत्र-जप से मन को शांति, श्रद्धा एवं सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
भगवान विष्णु — समस्त पाठ (आरती · चालीसा · मंत्र · भजन)
- श्रीबद्रीशाष्टकम्
- ॐ प्रलयपयोधिजले धृतवानसि वेदम् (श्रीदशावतार)
- शान्ताकारं ध्यान मन्त्र
- ॐ जय जगदीश हरे
- नारायण अष्टाक्षर मन्त्र
- श्री विष्णु चालीसा (सम्पूर्ण)
- विष्णु मूल मन्त्र
- विष्णु सहस्रनाम (ध्यान + प्रारम्भिक श्लोक)
- श्रीबदरीनाथाष्टकम् — भू-बैकुण्ठकृतावासं
- सशङ्खचक्रं सकिरीटकुण्डलं
- कुबेर मन्त्र
- नारायण सूक्तम्
- श्रीबदरीनाथ-स्तुति — पबन मंद सुगंध शीतल
- श्री विष्णु चालीसा
- भज गोविन्दम् (मोहमुद्गर)
- वेदानुद्धरते जगन्निवहते भूगोलमुद्विभ्रते
- जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे (सर्वरूप भगवान् आरती)
- द्वादशाक्षर विष्णु मन्त्र
- पुरुष सूक्तम् (प्रमुख श्लोक)
- विष्णु सहस्रनाम फलश्रुति
- अच्युताष्टकम् (शंकराचार्य)
- जय लक्ष्मीनारायण
- श्री विष्णु मन्त्र-संग्रह (द्वादशाक्षर + अष्टाक्षर + ध्यान श्लोक + 24 नाम)
- श्री विष्णु मंगल श्लोक (मङ्गलं भगवान् विष्णुः)
- अच्युतम् केशवम् कृष्णदामोदरम्
- ॐ जय जगदीश हरे (सम्पूर्ण)
- श्रीबदरीनाथ-महिमा — तुहिन गिरिमधि परम सुखप्रद
- जय लक्ष्मीरमणा
- जय जय श्रीबदरीनाथ जयति योग-ध्यानी
- दशावतार स्तोत्रम्
- शान्ताकारं (विष्णु ध्यान मन्त्र)