जय जय श्रीबदरीनाथ जयति योग-ध्यानी

भगवान विष्णु · Vishnu · आरती

जय जय श्रीबदरीनाथ जयति योग-ध्यानी — भगवान विष्णु

जय जय श्रीबदरीनाथ जयति योग-ध्यानी के बोल

जय जय श्रीबदरीनाथ जयति योग-ध्यानी॥ टेक ॥
निर्गुण सगुण स्वरूप, मेघवर्ण अति अनूप,
सेवत चरण सुरभूप, खानी विज्ञानी॥ जय जय०॥
झलकत है शीश छत्र, छबि अनूप अति विचित्र,
बरनत पावन चरित्र सकुचत बरबानी॥ जय जय०॥
तिलक भाल अति विशाल, गलमें मणि-मुक्त-माल,
प्रनतपाल अति दयाल, सेवक सुखदानी॥ जय जय०॥
कानन कुंडल ललाम, मूरति सुखमाकी धाम,
सुभिरत हों सिद्धि काम, कहत गुण खखानी॥ जय जय०॥
गावत गुण शंभु, शेष, इन्द्र, चन्द्र अरु दिनेश,
विनवत श्यामा हमेश जोरि जुगल पानी॥ जय जय०॥

जय जय श्रीबदरीनाथ जयति योग-ध्यानी — कब पढ़ें

भगवान विष्णु की आराधना का दिन गुरुवार है — अगला गुरुवार, 20 अगस्त को।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।

गुरु की वर्तमान स्थिति

गुरु इस समय कर्क राशि में हैं, और 31 अक्टू॰ 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।

ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।

अगला संबंधित व्रत

भगवान विष्णु से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।

भगवान विष्णु के अन्य पाठ