जय लक्ष्मीनारायण
भगवान विष्णु · Vishnu · आरती
जय लक्ष्मीनारायण के बोल
जय लक्ष्मीनारायण, जय लक्ष्मी-विष्णो।
जय माधव, जय श्रीपति, जय जय जय विष्णो॥ १॥ जय०॥
जय चम्पा सम-वर्णे जय नीरदकान्ते।
जय मन्द-स्मित-शोभे जय अदभुत शान्ते॥ २॥ जय०॥
कमल वराभय-हस्ते शङ्खादिकधारिन्।
जय कमलालयवासिनि गरुडासनचारिन्॥ ३॥ जय०॥
सच्चिन्मयकरचरणे सच्चिन्मयमूर्ते।
दिव्यानन्द-विलासिनि जय आनन्दमूर्ते॥ ४॥ जय०॥
तुम त्रिभुवनको माता, तुम त्राता।
तुम लोक-त्रय-जननी, तुम सबके धाता॥ ५॥ जय०॥
तुम धन-जन-सुख-संतति-जय देनेवाली।
परमानन्द-बिधाता तुम हो वनमाली॥ ६॥ जय०॥
तुम हो सुमति घरोंमें, तुम सबके स्वामी।
चेतन और अचेतनके अन्तर्यामी॥ ७॥ जय०॥
शरणागत हूँ, मुझपर कृपा करो माता।
जय लक्ष्मी-नारायण नव-मंगल-दाता॥ ८॥ जय०॥
जय लक्ष्मीनारायण — कब पढ़ें
भगवान विष्णु की आराधना का दिन गुरुवार है — अगला गुरुवार, 20 अगस्त को।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
गुरु की वर्तमान स्थिति
गुरु इस समय कर्क राशि में हैं, और 31 अक्टू॰ 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।
ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।
अगला संबंधित व्रत
भगवान विष्णु से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।