जय लक्ष्मीरमणा

भगवान विष्णु · Vishnu · आरती

जय लक्ष्मीरमणा — भगवान विष्णु

जय लक्ष्मीरमणा के बोल

जय लक्ष्मीरमणा, श्रीलक्ष्मीरमणा।
सत्यनारायण स्वामी जन-पातक-हरणा॥ जय०॥
रत्नजटित सिंहासन अदभुत छबि राजै।
नारद करत निराजन घंटा ध्वनि बाजै॥ जय०॥
प्रकट भये कलि कारण, द्विजको दरस दियो।
बूढ़े ब्राह्मण बनकर कंचन-महल कियो॥ जय०॥
दुर्बल भील कठारो, जिनपर कृपा करी।
चन्द्रचूड़ एक राजा, जिनकी बिपति हरी॥ जय०॥
वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीन्हीं।
सो फल भोग्यो प्रभुजी फिर अस्तुति कोन्हीं॥ जय०॥
भाव-भक्तिके कारण छिन-छिन रूप धरथो।
श्रद्धा धारण कोनी, तिनको काज सरधो॥ जय०॥
ग्वाल-बाल सँग राजा वनमें भक्ति करी।
मनवांछित फल दीन्हों दीनदयालु हरी॥ जय०॥
चढत प्रसाद सवायो कदलीफल, मेवा।
धूप-दीप-तुलसीसे राजी सत्यदेवा॥ जय०॥
सत्यनारायणजीकी आरति जो कोई नर गावै।
तन-मन-सुख-सम्पति मन-वांछित फल पावै॥ जय०॥

जय लक्ष्मीरमणा — कब पढ़ें

भगवान विष्णु की आराधना का दिन गुरुवार है — अगला गुरुवार, 20 अगस्त को।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।

गुरु की वर्तमान स्थिति

गुरु इस समय कर्क राशि में हैं, और 31 अक्टू॰ 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।

ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।

अगला संबंधित व्रत

भगवान विष्णु से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।

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