अनंत चतुर्दशी 2027 — मंगलवार, 14 सितंबर 2027

Anant Chaturdashi · भाद्रपद मास · 340 दिन बाद

अनंत चतुर्दशी 2027 कब है?

अनंत चतुर्दशी 2027 में मंगलवार, 14 सितंबर 2027 को है — आज से 340 दिन बाद।

भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी — भगवान अनंत (शेषशायी विष्णु) का व्रत; पूजन के बाद चौदह गाँठों वाला अनंत-सूत्र बाँधा जाता है। इसी दिन गणपति-विसर्जन के साथ गणेशोत्सव सम्पन्न होता है।

अनंत चतुर्दशी का महत्व

भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी — भगवान अनंत (शेषशायी विष्णु) का व्रत; पूजन के बाद चौदह गाँठों वाला अनंत-सूत्र बाँधा जाता है। इसी दिन गणपति-विसर्जन के साथ गणेशोत्सव सम्पन्न होता है।

यह पर्व भाद्रपद मास में पड़ता है। हिन्दू पर्व सौर तिथि पर नहीं, चन्द्र-तिथि पर तय होते हैं — इसीलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी कैलेंडर में इनकी तारीख़ बदलती है। यहाँ दी गई तिथि खगोलीय गणना (लाहिरी अयनांश) से निकाली गई है, किसी सूची से नहीं।

अनंत चतुर्दशी 2027 — पूजा का शुभ समय

सूर्योदय06:05
सूर्यास्त18:27
अभिजीत मुहूर्त11:51 – 12:41
ब्रह्म मुहूर्त04:29 – 05:17
राहुकाल (टालें)15:22 – 16:55
व्रत पारण06:05 के पश्चात् (15 सितंबर 2027)

समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर गणना किए गए हैं — अपने शहर का समय देखें। यह गणना खगोलीय है, किसी संग्रहीत सारणी से नहीं ली गई — और प्रचलित पंचांगों से मिलाकर जाँची गई है (गणना-सत्यापित)।

अनंत चतुर्दशी पूजा-विधि

  1. प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
  2. कलश स्थापित कर उस पर कुश से बनी शेषनाग-शायी भगवान अनंत (विष्णु) की प्रतिमा रखें।
  3. चौदह गाँठों वाला अनंत-सूत्र (कुमकुम/हल्दी से रँगा) भगवान के सामने रखकर गंध, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य से पूजन करें।
  4. 'ॐ अनंताय नमः' का जप कर अनंत व्रत-कथा सुनें और विष्णु आरती करें।
  5. पूजित अनंत-सूत्र पुरुष दाहिनी तथा स्त्रियाँ बाईं भुजा पर बाँधें।

अनंत चतुर्दशी पूजा सामग्री

कलश, कुश, अनंत-सूत्र (14 गाँठ), कुमकुम, हल्दी, पुष्प, तुलसी-दल, पंचामृत, फल, नैवेद्य, दीप, धूप

अनंत चतुर्दशी व्रत के नियम व विधि

व्रत उदया तिथि में रखा जाता है। पूजा के बाद अनंत-सूत्र बाँधा जाता है और उसे चौदह दिन या पूरे वर्ष धारण किया जाता है। व्रती एक समय बिना नमक का भोजन या फलाहार लेते हैं।

पूजा व मंत्र

विष्णु की आराधना इस पर्व का केंद्र है। मंत्र — ॐ अनंताय नमः (108 बार जप)।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग किया जा सकता है।

संबंधित पाठ व पर्व

अनंत चतुर्दशी की कथा

वनवास के कष्ट में पांडवों को श्रीकृष्ण ने अनंत व्रत करने को कहा था। व्रत-कथा में ब्राह्मणी सुशीला ने यह व्रत कर अनंत-सूत्र बाँधा, पर उसके पति कौण्डिन्य ने उसे साधारण धागा समझकर तोड़ फेंका और दरिद्र हो गए; पश्चाताप कर चौदह वर्ष व्रत करने पर उनका वैभव लौटा।

अनंत चतुर्दशी — आने वाले वर्षों की तिथियाँ

2026शुक्रवार, 25 सितंबर 2026
2027मंगलवार, 14 सितंबर 2027
2028शनिवार, 2 सितंबर 2028
2029शुक्रवार, 21 सितंबर 2029
2030मंगलवार, 10 सितंबर 2030

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