दुर्गा अष्टमी 2026 — सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
Durga Ashtami · आश्विन मास · 10 दिन बाद
दुर्गा अष्टमी 2026 कब है?
दुर्गा अष्टमी 2026 में सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को है — आज से 10 दिन बाद।
आश्विन शुक्ल अष्टमी — महाअष्टमी; कन्या-पूजन व संधि-पूजा।
दुर्गा अष्टमी का महत्व
आश्विन शुक्ल अष्टमी — महाअष्टमी; कन्या-पूजन व संधि-पूजा।
यह पर्व आश्विन मास में पड़ता है। हिन्दू पर्व सौर तिथि पर नहीं, चन्द्र-तिथि पर तय होते हैं — इसीलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी कैलेंडर में इनकी तारीख़ बदलती है। यहाँ दी गई तिथि खगोलीय गणना (लाहिरी अयनांश) से निकाली गई है, किसी सूची से नहीं।
दुर्गा अष्टमी 2026 — पूजा का शुभ समय
| सूर्योदय | 06:24 |
|---|---|
| सूर्यास्त | 17:47 |
| संधि पूजा | 10:28 – 11:16 |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:43 – 12:28 |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:48 – 05:36 |
| राहुकाल (टालें) | 07:49 – 09:15 |
| व्रत पारण | 06:24 के पश्चात् (20 अक्टूबर 2026) |
समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर गणना किए गए हैं — अपने शहर का समय देखें। यह गणना खगोलीय है, किसी संग्रहीत सारणी से नहीं ली गई — और प्रचलित पंचांगों से मिलाकर जाँची गई है (गणना-सत्यापित)।
दुर्गा अष्टमी पूजा-विधि
- प्रातः स्नान कर माँ दुर्गा का पूजन करें।
- अष्टमी-नवमी की संधि-पूजा का विशेष महत्व है।
- नौ कन्याओं व एक बालक (लांगुर) को भोजन कराएँ (कन्या-पूजन)।
- कन्याओं के पैर धोकर तिलक कर हलवा-पूरी-चना खिलाएँ व दक्षिणा दें।
- 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' का जप कर आरती करें।
दुर्गा अष्टमी पूजा सामग्री
लाल चुनरी, अक्षत, लाल पुष्प, हलवा-पूरी-चना, नारियल, दीप, श्रृंगार सामग्री
दुर्गा अष्टमी व्रत के नियम व विधि
अष्टमी को व्रती निराहार या फलाहार रहकर देवी का पूजन करते हैं; संधि-काल में 108 दीप जलाने की परम्परा है। कन्या-पूजन में नौ कन्याओं (दो से दस वर्ष) व एक बालक (लांगुर) के चरण धोकर तिलक कर हलवा-पूरी-चना का भोग तथा दक्षिणा दी जाती है। इस दिन तामसिक भोजन, मांस-मदिरा व कटु वचन वर्जित हैं; कन्याओं को कभी दान की तरह नहीं, देवी-स्वरूप मानकर आदर से भोजन कराया जाता है।
पूजा व मंत्र
दुर्गा की आराधना इस पर्व का केंद्र है। मंत्र — ॐ दुं दुर्गायै नमः (108 बार जप)।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग किया जा सकता है।
संबंधित पाठ व पर्व
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दुर्गा अष्टमी की कथा
नवरात्रि की अष्टमी देवी की उग्र-कृपा का दिन है। परम्परा कहती है कि महिषासुर के साथ युद्ध में चण्ड और मुण्ड नामक असुरों ने नियम तोड़कर देवी पर पीछे से आक्रमण किया; तब देवी के क्रोध से चामुण्डा प्रकट हुईं और उन्होंने दोनों का संहार किया। यह क्षण अष्टमी और नवमी की संधि पर माना जाता है — इसीलिए उन अड़तालीस मिनटों (अष्टमी के अंतिम चौबीस व नवमी के प्रथम चौबीस) की संधि-पूजा बंगाल में दुर्गा-पूजा का सबसे प्रबल काल है, जिसमें 108 दीप जलाए जाते हैं। उत्तर भारत में इसी दिन कन्या-पूजन होता है — नौ कन्याओं में देवी के नौ रूप देखकर उनका पूजन, भोजन व दक्षिणा।
दुर्गा अष्टमी — क्षेत्रीय परम्पराएँ
बंगाल-असम-ओडिशा में यह महाष्टमी है — पुष्पांजलि व संधि-पूजा का दिन; उत्तर भारत में कन्या-पूजन; हिमाचल व पंजाब में अष्टमी को ही व्रत का पारण; दक्षिण में आयुध-पूजा की तैयारी इसी दिन से।
दुर्गा अष्टमी — आने वाले वर्षों की तिथियाँ
| 2025 | मंगलवार, 30 सितंबर 2025 |
|---|---|
| 2026 | सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 |
| 2027 | गुरुवार, 7 अक्टूबर 2027 |
| 2028 | मंगलवार, 26 सितंबर 2028 |
| 2029 | रविवार, 14 अक्टूबर 2029 |