नवरात्रि — नौ दिन, नौ देवियाँ
रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 · आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी
नौ दिन, नौ देवियाँ — रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
- दिन १ — माँ शैलपुत्री — रविवार, 11 अक्टूबर 2026 · रंग नारंगी · नैवेद्य गाय का शुद्ध घी (या घी से बना भोग)
पर्वतराज हिमालय की पुत्री (पूर्वजन्म में सती); वृषभ पर सवार, दाएँ हाथ में त्रिशूल, बाएँ में कमल, मस्तक पर अर्धचन्द्र। - दिन २ — माँ ब्रह्मचारिणी — सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 · रंग सफ़ेद · नैवेद्य शक्कर / मिश्री
तपस्या का स्वरूप — शिव को पाने हेतु कठोर तप; दाएँ हाथ में जपमाला, बाएँ में कमण्डलु; नंगे पाँव। - दिन ३ — माँ चन्द्रघण्टा — मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 · रंग लाल · नैवेद्य दूध या दूध से बनी मिठाई/खीर
मस्तक पर घण्टे के आकार का अर्धचन्द्र; दस भुजाएँ, सिंह/बाघ पर सवार; युद्ध-मुद्रा में शान्त-सौम्य। - दिन ४ — माँ कूष्माण्डा — बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 · रंग गहरा नीला · नैवेद्य मालपुआ
मन्द हास्य से ब्रह्माण्ड की रचना करने वाली; अष्टभुजा (कमण्डलु, धनुष, बाण, कमल, अमृत-कलश, चक्र, गदा, जपमाला); सिंहवाहिनी; सूर्यमण्डल में निवास। - दिन ५ — माँ स्कन्दमाता — गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 · रंग पीला · नैवेद्य केला
भगवान स्कन्द (कार्तिकेय) की माता; गोद में बाल स्कन्द; चतुर्भुजा, दो हाथों में कमल; कमलासना (पद्मासना), सिंहवाहिनी। - दिन ६ — माँ कात्यायनी — शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 · रंग हरा · नैवेद्य शहद
महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट — महिषासुर-मर्दिनी; चतुर्भुजा (तलवार, कमल, अभय, वर); सिंहवाहिनी। ब्रज की गोपियों ने कृष्ण-प्राप्ति हेतु इनकी पूजा की। - दिन ७ — माँ कालरात्रि — शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 · रंग स्लेटी · नैवेद्य गुड़ (या गुड़ से बना भोग)
घोर कृष्णवर्णा, बिखरे केश, गले में विद्युत-सी माला, तीन नेत्र, गर्दभ-वाहन; भयंकर रूप पर सदा शुभ फल देने वाली — इसलिए 'शुभंकरी'। - दिन ८ — माँ महागौरी — रविवार, 18 अक्टूबर 2026 · रंग बैंगनी · नैवेद्य नारियल
अत्यन्त गौर वर्ण, श्वेत वस्त्र-आभूषण; वृषभ-वाहन; चतुर्भुजा (त्रिशूल, डमरू, अभय, वर)। तप से श्याम हुई देह को शिव ने गंगाजल से गौर किया। - दिन ९ — माँ सिद्धिदात्री — सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 · रंग मोरपंखी हरा · नैवेद्य तिल / हलवा-पूरी-चना (कन्या-भोज)
सब सिद्धियाँ (अणिमा आदि) देने वाली; कमलासना/सिंहवाहिनी, चतुर्भुजा (चक्र, गदा, शंख, कमल)। शिव ने इनकी कृपा से सिद्धियाँ पाईं (अर्धनारीश्वर)।
नवरात्रि 2026 की प्रमुख तिथियाँ
- घटस्थापना — रविवार, 11 अक्टूबर 2026 (आश्विन शुक्ल प्रतिपदा)
- दुर्गाष्टमी · कन्या-पूजन — सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 (उदया अष्टमी; सन्धि-पूजा इसी दिन)
- महानवमी — सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 (नवमी तिथि दोपहर से — इस वर्ष अष्टमी-नवमी एक ही दिन; हवन व पूर्णाहुति)
- विजयादशमी (दशहरा) — मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026
तिथियाँ पञ्चाङ्ग से गणित हैं; स्थानीय सूर्योदय से कुछ मिनट का अन्तर सम्भव है।
नवरात्रि 2026 के नौ रंग
- दिन १ — माँ शैलपुत्री (रविवार, 11 अक्टूबर 2026): नारंगी
- दिन २ — माँ ब्रह्मचारिणी (सोमवार, 12 अक्टूबर 2026): सफ़ेद
- दिन ३ — माँ चन्द्रघण्टा (मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026): लाल
- दिन ४ — माँ कूष्माण्डा (बुधवार, 14 अक्टूबर 2026): गहरा नीला
- दिन ५ — माँ स्कन्दमाता (गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026): पीला
- दिन ६ — माँ कात्यायनी (शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026): हरा
- दिन ७ — माँ कालरात्रि (शनिवार, 17 अक्टूबर 2026): स्लेटी
- दिन ८ — माँ महागौरी (रविवार, 18 अक्टूबर 2026): बैंगनी
- दिन ९ — माँ सिद्धिदात्री (सोमवार, 19 अक्टूबर 2026): मोरपंखी हरा
नवरात्रि के रंग लोक-परम्परा हैं — क्रम आरम्भ के वार से चलता है, इसलिए हर वर्ष सूची बदलती है।
नवरात्रि पूजा विधि (सम्पूर्ण क्रम)
नित्य नवरात्रि पूजा का क्रम (षोडशोपचार) — प्रत्येक चरण का मन्त्र अलग item में।
- १. स्नान, स्वच्छ वस्त्र; पूजा-स्थान पर पूर्व/उत्तर मुख बैठें। आचमन (ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः) और पवित्रीकरण।
- २. दीप प्रज्वलन।
- ३. संकल्प — प्रथम दिन पूर्ण; शेष दिनों में संक्षिप्त।
- ४. गणेश पूजन।
- ५. कलश पूजन — प्रथम दिन स्थापना; रोज़ गन्ध-पुष्प।
- ६. देवी ध्यान / उस दिन की देवी का ध्यान — Day page)।
- ७. आवाहन।
- ८–२२. आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, गन्ध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, फल, ताम्बूल, दक्षिणा …054)।
- २३. पाठ — Quick Path चुनें (QP-*) या सप्तशती।
- २४. आरती (अम्बे जी की आरती — OmAartiSangrah के आरती-संग्रह से link)।
- २५. पुष्पाञ्जलि, प्रदक्षिणा।
- २६. क्षमा प्रार्थना।
पूजा के चरण (२३)
- घटस्थापना विधि व मुहूर्त — घटस्थापना = नवरात्रि के प्रथम दिन (आश्विन शुक्ल प्रतिपदा) शुभ मुहूर्त में कलश (घट) की स्थापना — इसे देवी का आवाहन-स्थान माना जाता है। विस्तृत चरण: (कलश स्थापना)।
- कलश स्थापना — विधि व मन्त्र — (१) हे कलश! (सोम-रस/जल) तुम में प्रवेश करे; तुम ऊर्जा सहित हजारों धाराओं से दूध-सी समृद्धि दो और धन मुझमें प्रवेश करे। (२) हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु, कावेरी! इस जल में उपस्थित होओ। (३) कलश के मुख म
- संकल्प (नवरात्रि) — देश-काल का उच्चारण (ब्रह्मा के दिन के द्वितीय परार्ध, श्वेतवाराह कल्प, वैवस्वत मन्वन्तर, कलियुग के प्रथम चरण में, जम्बूद्वीप-भारतवर्ष में, अमुक संवत्सर-मास-पक्ष-तिथि-वार को) करके — मैं (नाम, गोत्र) श्रीदुर्गा देवी की प्र
- गणेश वन्दना — हे टेढ़ी सूँड़ वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव! मेरे सब कार्यों में सदा विघ्न दूर करें। 'ॐ गं गणपतये नमः' — गणपति को नमस्कार।
- देवी आवाहन — हे महादेवि! आप पधारें और इस स्थान पर स्थिर हों; जब तक मैं पूजा करूँ, तब तक आप यहाँ विराजमान रहें।
- देवी ध्यान (पूजा चरण) — पूजा के 'ध्यान' उपचार में: (क) उस दिन की नवदुर्गा का ध्यान-श्लोक (NAV-Dx → dhyana), या (ख) त्रिचरित्र ध्यान।
- उपचार — आसन — अनेक रत्नों और मणियों से युक्त स्वर्णमय दिव्य आसन ग्रहण करें। (आसन के लिए पुष्प अर्पित करें।)
- उपचार — पाद्य — गंगा आदि सब तीर्थों से प्रार्थनापूर्वक लाया यह सुखद जल चरण धोने हेतु ग्रहण करें।
- उपचार — अर्घ्य — गन्ध, पुष्प और अक्षत से युक्त यह अर्घ्य मैंने तैयार किया है; हे महादेवि! ग्रहण करें और सदा प्रसन्न रहें।
- उपचार — आचमन — कर्पूर से सुगन्धित, स्वादिष्ट, शीतल जल आचमन हेतु ग्रहण करें।
- उपचार — स्नान — मन्दाकिनी (गंगा) से लाए, कपूर और अगरु से सुवासित इन सुगन्धित जलों से स्नान करें। (प्रतिमा न हो तो जल छिड़कें।)
- उपचार — वस्त्र — सर्दी-हवा-गर्मी से बचाने वाला, लज्जा की रक्षा करने वाला, शरीर को सजाने वाला वस्त्र अर्पित है; मुझे शान्ति दें। (लाल चुनरी अर्पण।)
- उपचार — गन्ध (चन्दन) — दिव्य, सुगन्धित, मनोहर श्रीखण्ड चन्दन लेपन हेतु ग्रहण करें। (देवी को रोली/कुमकुम भी।)
- उपचार — अक्षत — कुमकुम से रंगे सुन्दर अक्षत भक्ति से अर्पित हैं; हे परमेश्वरि! ग्रहण करें।
- उपचार — पुष्प — सुगन्धित मालाएँ और मालती आदि पुष्प पूजा हेतु लाया हूँ; ग्रहण करें। (देवी को लाल पुष्प — गुड़हल/जपा — प्रिय माने जाते हैं।)
- उपचार — धूप — वनस्पतियों के रस से बना, उत्तम सुगन्ध वाला, सब देवताओं के सूँघने योग्य यह धूप ग्रहण करें।
- उपचार — दीप — घी और बत्ती से युक्त, अग्नि से प्रज्वलित, तीनों लोकों का अन्धकार हरने वाला दीप ग्रहण करें।
- उपचार — नैवेद्य — शक्कर-मिठाई, दही, दूध, घी और भक्ष्य-भोज्य आहार नैवेद्य रूप में ग्रहण करें।
- उपचार — फल — हे देवि! यह फल आपके सामने रखा है; इससे जन्म-जन्म में मेरे कार्य सफल हों।
- उपचार — ताम्बूल — इलायची, लौंग, कस्तूरी और कपूर से युक्त, पुष्प से सुवासित यह पान का बीड़ा मुख-शुद्धि के लिए हे सुरेश्वरी! आपको अर्पित करता हूँ।
- उपचार — दक्षिणा — हिरण्यगर्भ (ब्रह्मा) के गर्भ में स्थित, अग्नि का बीज (स्वर्ण), अनन्त पुण्य फल देने वाली यह दक्षिणा अर्पित है; मुझे शान्ति दें।
- पुष्पाञ्जलि (पूजा चरण)
- क्षमा प्रार्थना — १. मुझसे दिन-रात हजारों अपराध होते हैं; 'यह मेरा दास है' मानकर हे परमेश्वरि! क्षमा करें। २. मैं न आवाहन जानता हूँ, न विसर्जन, न पूजा — क्षमा करें। ३. हे सुरेश्वरि! मन्त्र, क्रिया और भक्ति से रहित जो भी पूजा मैंने की, वह
अष्टमी · नवमी · कन्या-पूजन
- दुर्गाष्टमी पूजा — अष्टमी = महागौरी पूजन; कई परिवारों में इसी दिन कन्या-पूजन और हवन। कुछ वर्षों में अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ जाती हैं — तब दोनों के कर्म उसी दिन किए जाते हैं। इस वर्ष की तिथि ऊपर पञ्चाङ्ग से दी गई है।
- महाअष्टमी पूजा व सन्धि पूजा — महाअष्टमी पर अष्टमी तिथि के अन्तिम २४ मिनट और नवमी के प्रथम २४ मिनट का काल 'सन्धि काल' है — इसमें चामुण्डा की सन्धि पूजा (१०८ दीप, १०८ कमल) की परम्परा, विशेषकर बंगाल दुर्गापूजा में।
- महानवमी पूजा — नवमी = सिद्धिदात्री पूजन; नवरात्रि का अन्तिम पूजा-दिवस — हवन, कन्या-पूजन, पूर्णाहुति। जिन वर्षों में अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ती हैं, वहाँ कई पञ्चाङ्ग नवमी-होम अगले प्रातः तक दर्शाते हैं; अपने पञ्चाङ्ग से पुष्टि करें।
- नवमी हवन — नवमी पर हवन — विधि हवन-खंड के अनुसार। कुछ वर्षों में पञ्चाङ्ग नवमी-होम अगले प्रातः दर्शाते हैं; अपने पञ्चाङ्ग से पुष्टि करें।
- पूर्णाहुति (नवमी)
- विसर्जन / समापन प्रार्थना — हे श्रेष्ठ देवि परमेश्वरि! अब अपने धाम को पधारें, और पूजा-आराधना के समय पुनः आने की कृपा करें।
- कन्या / कंजक पूजन विधि — देवी भागवत पुराण (स्कन्ध ३, अध्याय २६–२७) में कुमारी-पूजन का विधान; २ से १० वर्ष की कन्याओं को देवी-रूप मानकर पूजन।
- कन्या पूजन मन्त्र — हे जगत् द्वारा पूजित और वन्दित, सर्वशक्तिस्वरूपिणी कुमारी! पूजा ग्रहण करो; हे जगन्माता! तुम्हें नमस्कार।
- कन्या पूजन सामग्री
- कन्या भोजन / प्रसाद — लोक-प्रचलित भोग: सूजी का हलवा, पूरी, सूखे काले चने; साथ में नारियल/फल। सात्त्विक, बिना प्याज-लहसुन।
हवन
- सरल नवरात्रि हवन विधि (घर पर) — गृहस्थ के लिए सरल हवन-क्रम। विस्तृत पुरोहितीय चण्डी-होम (सप्तशती के ७०० मन्त्रों से आहुति) Advanced section में।
- अग्नि स्थापना मन्त्र — मैं देवताओं के दूत, हवि पहुँचाने वाले अग्निदेव को आगे स्थापित करता हूँ और उनकी स्तुति करता हूँ; वे देवताओं को यहाँ बैठाएँ।
- हवन संकल्प — देश-काल उच्चारण के बाद — मैं (नाम, गोत्र) अपने समस्त पापों के क्षय, शुभ फल की प्राप्ति, श्रीदुर्गा की प्रसन्नता और सप्तशती-पाठ की सिद्धि के लिए हवन करूँगा — यह संकल्प।
- हवन में देवी आवाहन
- सामान्य देवी हवन मन्त्र — प्रत्येक मन्त्र के अन्त में 'स्वाहा' बोलकर अग्नि में घी/सामग्री की आहुति।
- नवार्ण मन्त्र आहुति (सन्दर्भ सहित) — नवार्ण मन्त्र से आहुति (परम्परा: १०८)। सन्दर्भ:।
- 'स्वाहा' — अर्थ व नियम — 'स्वाहा' अग्निदेव की पत्नी/शक्ति का नाम और आहुति-समर्पण का वैदिक शब्द — 'भली-भाँति अर्पित'। 'स्वाहा' उच्चारण के साथ ही आहुति अग्नि में डालें; दाहिने हाथ की मध्यमा-अनामिका-अँगूठे से सामग्री।
- पूर्णाहुति मन्त्र — वह (परब्रह्म) पूर्ण है, यह (जगत्) पूर्ण है; पूर्ण से पूर्ण उत्पन्न होता है; पूर्ण में से पूर्ण निकाल लेने पर भी पूर्ण ही शेष रहता है — (यह) आहुति अर्पित है।
- हवन के बाद क्षमा प्रार्थना
समय कम हो तो
- ५ मिनट — सप्तश्लोकी दुर्गा, सर्वमङ्गलमङ्गल्ये, आज की देवी का मन्त्र ×११ (NAV-Dx)
- १०–१५ मिनट — सप्तश्लोकी दुर्गा, दुर्गा चालीसा, दुर्गाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र / १०८ नामावली
- २०–३० मिनट — देवी कवच, अर्गला, कीलक, नारायणी स्तुति या या देवी सर्वभूतेषु, क्षमा प्रार्थना
- ४५–६० मिनट — कवच-अर्गला-कीलक, आज का सप्तशती भाग (NAV-Dx → aaj_ka_path), क्षमा प्रार्थना
- सम्पूर्ण चण्डी पाठ (२.५–४ घण्टे) — → path_vidhi_order पूरा क्रम
नवरात्रि में क्या पढ़ें
नवरात्रि का प्रधान पाठ दुर्गा सप्तशती है — १३ अध्याय, ७०० श्लोक, कवच → अर्गला → कीलक के पाठ-विधि क्रम सहित।
- देवी कवच — पाठ से पूर्व, रक्षा-कवच
- अर्गला स्तोत्र व कीलक स्तोत्र — सप्तशती के अङ्ग
- नवार्ण मन्त्र — नौ अक्षरों का मूल मन्त्र, नित्य जप हेतु
- श्री दुर्गा चालीसा · जय अम्बे गौरी आरती
- सप्तश्लोकी दुर्गा — समय कम हो तब सात श्लोक
- माँ दुर्गा के सभी पाठ
- नवरात्रि की तिथि, मुहूर्त व पूजा-विधि