कार्तिक पूर्णिमा 2026 — मंगलवार, 24 नवंबर 2026

Kartik Purnima · कार्तिक मास · 44 दिन बाद

कार्तिक पूर्णिमा 2026 कब है?

कार्तिक पूर्णिमा 2026 में मंगलवार, 24 नवंबर 2026 को है — आज से 44 दिन बाद।

कार्तिक पूर्णिमा — देव दीपावली; गंगा-स्नान व दीपदान का महापर्व।

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

कार्तिक पूर्णिमा — देव दीपावली; गंगा-स्नान व दीपदान का महापर्व।

यह पर्व कार्तिक मास में पड़ता है। हिन्दू पर्व सौर तिथि पर नहीं, चन्द्र-तिथि पर तय होते हैं — इसीलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी कैलेंडर में इनकी तारीख़ बदलती है। यहाँ दी गई तिथि खगोलीय गणना (लाहिरी अयनांश) से निकाली गई है, किसी सूची से नहीं।

कार्तिक पूर्णिमा 2026 — पूजा का शुभ समय

सूर्योदय06:50
सूर्यास्त17:24
स्नान-दान (पुण्य काल)05:14 – 08:50
अभिजीत मुहूर्त11:46 – 12:28
ब्रह्म मुहूर्त05:14 – 06:02
राहुकाल (टालें)14:46 – 16:05

समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर गणना किए गए हैं — अपने शहर का समय देखें। यह गणना खगोलीय है, किसी संग्रहीत सारणी से नहीं ली गई — और प्रचलित पंचांगों से मिलाकर जाँची गई है (गणना-सत्यापित)।

कार्तिक पूर्णिमा पूजा-विधि

  1. ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी (गंगा) में स्नान करें।
  2. भगवान विष्णु व शिव का पूजन कर तुलसी-दल अर्पित करें।
  3. संध्या को नदी-घाट व मंदिर में दीपदान करें (देव दीपावली)।
  4. 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करें।
  5. अन्न, वस्त्र व दीप का दान करें।

कार्तिक पूर्णिमा पूजा सामग्री

दीप, तेल-बाती, तुलसी-दल, पुष्प, अक्षत, गंगाजल, धूप, दान-सामग्री

कार्तिक पूर्णिमा — क्या करें, क्या न करें

इस दिन गंगा-स्नान, दीपदान व अन्न-दान का विशेष विधान है; ब्रह्म मुहूर्त का स्नान श्रेष्ठ माना गया है। संध्या को नदी, तालाब या घर के आँगन में दीप प्रवाहित/प्रज्वलित किए जाते हैं — काशी में यही देव दीपावली है। तुलसी-पूजन व दीपदान के साथ इस दिन का व्रत पूर्ण होता है। मांस, मदिरा व तामसिक भोजन वर्जित हैं; यह दिन गुरु नानक जयंती भी है, अतः अनेक घरों में लंगर व सेवा का आयोजन होता है।

पूजा व मंत्र

विष्णु-शिव की आराधना इस पर्व का केंद्र है। मंत्र — ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (108 बार जप)।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग किया जा सकता है।

संबंधित पाठ व पर्व

कार्तिक पूर्णिमा की कथा

कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारि पूर्णिमा भी कहते हैं। परम्परा में त्रिपुरासुर नामक असुर ने तीन अभेद्य नगरियाँ बना ली थीं और देवता त्रस्त थे; भगवान शिव ने इसी तिथि को एक ही बाण से तीनों का संहार किया, और देवताओं ने दीप जलाकर उत्सव मनाया — इसीलिए काशी के घाटों पर आज भी देव दीपावली सजती है। यही दिन गंगा-स्नान व दीपदान का महापर्व है। सिख परम्परा में यह गुरु नानक देव जी का प्रकाश-पर्व है, और जैन परम्परा में इस दिन शत्रुंजय-यात्रा का विधान है — एक ही तिथि, अनेक परम्पराओं का प्रकाश।

कार्तिक पूर्णिमा — क्षेत्रीय परम्पराएँ

काशी की देव दीपावली — घाटों पर लाखों दीप; पुष्कर व गढ़मुक्तेश्वर के मेले; सिख परम्परा में गुरु नानक देव जी का प्रकाश-पर्व; जैन परम्परा में इसे कार्तिक पूर्णिमा यात्रा कहा जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा — आने वाले वर्षों की तिथियाँ

2025बुधवार, 5 नवंबर 2025
2026मंगलवार, 24 नवंबर 2026
2027रविवार, 14 नवंबर 2027
2028गुरुवार, 2 नवंबर 2028
2029बुधवार, 21 नवंबर 2029

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