श्री दुर्गा ध्यान मन्त्र (सिंहस्था शशिशेखरा)

माँ दुर्गा · Durga · मंत्र

श्री दुर्गा ध्यान मन्त्र (सिंहस्था शशिशेखरा) — माँ दुर्गा

श्री दुर्गा ध्यान मन्त्र (सिंहस्था शशिशेखरा) के बोल

॥ श्री दुर्गा ध्यान मन्त्र ॥

सिंहस्था शशिशेखरा मरकतप्रख्यैश्चतुर्भिर्भुजैः
शङ्खं चक्रधनुःशरांश्च दधती नेत्रैस्त्रिभिः शोभिता।
आमुक्ताङ्गदहारकङ्कणरणत्काञ्चीरणन्नूपुरा
दुर्गा दुर्गतिहारिणी भवतु नो रत्नोल्लसत्कुण्डला॥

ॐ श्री दुर्गायै नमः, ध्यानार्थे अक्षतपुष्पाणि समर्पयामि।

अर्थ: सिंह पर विराजमान, मस्तक पर चन्द्रमा धारण किए, मरकत-मणि के समान
आभा वाली चार भुजाओं में शंख, चक्र, धनुष व बाण धारण किए, तीन नेत्रों से
सुशोभित, बाजूबन्द-हार-कंगन-करधनी-नूपुर से अलंकृत, रत्नजड़ित कुण्डल वाली
दुर्गति-हारिणी माँ दुर्गा हम पर कृपा करें।

【 अन्य प्रचलित दुर्गा ध्यान श्लोक 】
ॐ कालाभ्राभां कटाक्षैररिकुलभयदां मौलिबद्धेन्दुरेखां
शङ्खं चक्रं कृपाणं त्रिशिखमपि करैरुद्वहन्तीं त्रिनेत्राम्।
सिंहस्कन्धाधिरूढां त्रिभुवनमखिलं तेजसा पूरयन्तीं
ध्यायेद् दुर्गां जयाख्यां त्रिदशपरिवृतां सेवितां सिद्धिकामैः॥

श्री दुर्गा ध्यान मन्त्र (सिंहस्था शशिशेखरा) — कब पढ़ें

आज मंगलवार है — माँ दुर्गा की आराधना का दिन। आज का जप विशेष फलदायी माना गया है।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।

अगला संबंधित व्रत

माँ दुर्गा से जुड़ा अगला व्रत — मासिक दुर्गाष्टमी, गुरुवार, 20 अगस्त (2 दिन बाद)।

माँ दुर्गा मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; माँ दुर्गा की आराधना का वार मंगलवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।

माला: **रुद्राक्ष अथवा लाल चन्दन** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

माँ दुर्गा के अन्य पाठ