2 नवंबर 2028 का पंचांग
गुरुवार · शुक्ल पक्ष
पंचांग विवरण
| तिथि | शुक्ल पूर्णिमा |
|---|---|
| वार | गुरुवार |
| नक्षत्र | भरणी |
| योग | सिद्धि |
| करण | बव |
| चन्द्र राशि | मेष |
| सूर्य राशि | तुला |
सूर्योदय, सूर्यास्त व मुहूर्त
| सूर्योदय | 06:34 |
|---|---|
| सूर्यास्त | 17:35 |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:42 – 12:26 |
| राहुकाल | 13:27 – 14:49 |
| यमगण्ड | 06:34 – 07:56 |
| गुलिक काल | 09:19 – 10:41 |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:58 – 05:46 |
नई दिल्ली के सूर्योदय पर आधारित। राहुकाल व यमगण्ड में नया शुभ कार्य आरंभ न करें।
2 नवंबर 2028 के शुभ चौघड़िया
- शुभ — 06:34 – 07:56
- लाभ — 12:04 – 13:27
- अमृत — 13:27 – 14:49
- शुभ — 16:12 – 17:35
2 नवंबर 2028 ग्रहों की स्थिति
| ग्रह | राशि |
|---|---|
| सूर्य | तुला |
| चन्द्र | मेष |
| मंगल | सिंह |
| बुध | तुला |
| गुरु | कन्या |
| शुक्र | कन्या |
| शनि | मेष (वक्री) |
| राहु | धनु (वक्री) |
| केतु | मिथुन (वक्री) |
निरयन (लाहिरी) गणना — विस्तृत गोचर व आज का राशिफल देखें।
आगामी व्रत एवं पर्व
- पूर्णिमा — गुरुवार, 2 नवंबर 2028 (आज)
- कृष्ण पक्ष एकादशी — सोमवार, 13 नवंबर 2028
- कृष्ण प्रदोष — मंगलवार, 14 नवंबर 2028
- अमावस्या — गुरुवार, 16 नवंबर 2028
गणेश चतुर्थी — स्थापना व विसर्जन का मुहूर्त
गणपति मुहूर्त 2026 — गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026। स्थापना का मध्याह्न काल, डेढ़ से दस दिन तक विसर्जन की तिथियाँ तथा उस दिन के शुभ चौघड़िया — अपने शहर के सूर्योदय से गणना।
पंचांग के पाँच अंग
पंचांग का अर्थ है पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग व करण। तिथि चन्द्रमा व सूर्य के अंतर से, नक्षत्र चन्द्रमा की स्थिति से, योग दोनों के योग से तथा करण तिथि के आधे भाग से निकलता है।
2 नवंबर 2028 गुरुवार को शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि, भरणी नक्षत्र, सिद्धि योग व बव करण है। चन्द्रमा मेष राशि में तथा सूर्य तुला राशि में हैं।
यह गणना खगोलीय (astronomy-engine + लाहिरी अयनांश) है — तिथियाँ अनुमान से नहीं, गणना से निकलती हैं।
किसी और दिन का पंचांग
- 1 नवंबर 2028 (बीता कल)
- 3 नवंबर 2028 (कल)
- 4 नवंबर 2028
- 5 नवंबर 2028
- 6 नवंबर 2028
- 7 नवंबर 2028
- 8 नवंबर 2028
- 9 नवंबर 2028
नवंबर 2028 — 1 · 2 · 3 · 4 · 5 · 6 · 7 · 8 · 9 · 10 · 11 · 12 · 13 · 14 · 15 · 16 · 17
हर दिन का तिथि, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय व राहुकाल — खगोलीय गणना से, किसी सूची से नहीं।
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