इन्दिरा स्तुति (पद्म पुराण)
माँ लक्ष्मी · Lakshmi · स्तोत्र
इन्दिरा स्तुति (पद्म पुराण) के बोल
नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरिप्रिये।
या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात् त्वदर्चनात्॥
लक्ष्मीं क्षीरसमुद्ररासजनितां श्रीरङ्गधामेश्वरीं
दासीभूतसमस्तदेवविनुतां लोकैकदीपाङ्कुराम्।
श्रीमन्मन्दकटाक्षलब्धविभवब्रह्मेन्द्रगङ्गाधरां
त्वां त्रैलोक्यकुटुम्बिनीं सरसिजां वन्दे मुकुन्दप्रियाम्॥
सिद्धलक्ष्मीर्मोक्षलक्ष्मीर्जयलक्ष्मी सरस्वती।
श्रीलक्ष्मीर्वरलक्ष्मी च प्रसन्ना मम सर्वदा॥
वरांकुशौ पाशमभीतिमुद्रां करैर्दधानां कमलासनस्थाम्।
बालार्कभासां मणिकुण्डलाढ्यां वन्देऽरविन्दस्थितचारुदेहाम्॥
नमः पद्मप्रिये देवि नमः पद्मदलेक्षणे।
नमः पद्मप्रियायै च नमः पद्मासनप्रिये॥
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
— स्रोत: पद्मपुराण — इन्दिरा लक्ष्मी स्तुति
इन्दिरा स्तुति (पद्म पुराण) — कब पढ़ें
आज शुक्रवार है — माँ लक्ष्मी की आराधना का दिन। आज का जप विशेष फलदायी माना गया है।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
शुक्र की वर्तमान स्थिति
शुक्र इस समय तुला राशि में (वक्री) हैं, और 6 नव॰ 2026 को कन्या राशि में प्रवेश करेंगे।
ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।
अगला संबंधित व्रत
माँ लक्ष्मी से जुड़ा अगला व्रत — पूर्णिमा, सोमवार, 26 अक्टूबर (17 दिन बाद)।
माँ लक्ष्मी मंत्र जप की विधि
जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; माँ लक्ष्मी की आराधना का वार शुक्रवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
माला: **कमलगट्टा अथवा स्फटिक** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।
जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।