लक्ष्मी मूल मन्त्र (सप्तविंशत्यक्षर)
माँ लक्ष्मी · Lakshmi · मंत्र
लक्ष्मी मूल मन्त्र (सप्तविंशत्यक्षर) के बोल
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद।
श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥
लक्ष्मी मूल मन्त्र (सप्तविंशत्यक्षर) — कब पढ़ें
आज शुक्रवार है — माँ लक्ष्मी की आराधना का दिन। आज का जप विशेष फलदायी माना गया है।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
शुक्र की वर्तमान स्थिति
शुक्र इस समय तुला राशि में (वक्री) हैं, और 6 नव॰ 2026 को कन्या राशि में प्रवेश करेंगे।
ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।
अगला संबंधित व्रत
माँ लक्ष्मी से जुड़ा अगला व्रत — पूर्णिमा, सोमवार, 26 अक्टूबर (17 दिन बाद)।
माँ लक्ष्मी मंत्र जप की विधि
जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; माँ लक्ष्मी की आराधना का वार शुक्रवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
माला: **कमलगट्टा अथवा स्फटिक** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।
जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।