जय जय जगजननि देवि सुर-नर-मुनि-असुर-सेवि

माँ काली · Kali · स्तोत्र

जय जय जगजननि देवि सुर-नर-मुनि-असुर-सेवि — माँ काली

जय जय जगजननि देवि सुर-नर-मुनि-असुर-सेवि के बोल

जय जय, जगजननि देवि सुर-नर-मुनि-असुर-सेवि,
भुक्ति-मुक्ति-दायिनि भयहरणि कालिका।
मंगल-मुद-सिद्धि-सदनि, पर्वशर्वरीश-वदनि,
ताप-तिमिर तरुण-तरणि-किरणमालिका॥ १॥
वर्म-चर्म-कर-कृपाण शूल-शेल-धनुष-बाण-
धरणि, दलनि दानव-दल, रण-करालिका।
पूतना-पिशाच-प्रेत डाकिनि-शाकिनि-समेत
भूत-ग्रह-बेताल-खग-मृगालि-जालिका॥ २॥
जय महेश-भामिनी अनेक-रूप-नामिनी,
समस्त-लोक-स्वामिनी हिमशैल-बालिका।
रघुपति-पद परम प्रेम, तुलसी यह अचल नेम,
देहु ह्वै प्रसन्न पाहि प्रनतपालिका॥ ३॥

जय जय जगजननि देवि सुर-नर-मुनि-असुर-सेवि — कब पढ़ें

माँ काली की आराधना का दिन शनिवार है — अगला शनिवार, 22 अगस्त को।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।

अगला संबंधित व्रत

माँ काली से जुड़ा अगला व्रत — मासिक दुर्गाष्टमी, गुरुवार, 20 अगस्त (2 दिन बाद)।

माँ काली मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; माँ काली की आराधना का वार शनिवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।

माला: **रुद्राक्ष अथवा लाल चन्दन** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

माँ काली के अन्य पाठ