श्री काली चालीसा (दुर्गासप्तशती आधारित)

माँ काली · Kali · चालीसा

श्री काली चालीसा (दुर्गासप्तशती आधारित) — माँ काली

श्री काली चालीसा (दुर्गासप्तशती आधारित) के बोल

॥ दोहा ॥
जय काली महाकाली जय जगत जननी।
रक्तबीज संहारिणी अम्बे दुखभंजनी॥

॥ चौपाई ॥
जय जय काली जय महाकाली। जय चामुण्डे जय भद्रकाली॥
करालवदना दिगम्बरा माँ। मुण्डमाल भूषण भयकारा माँ॥
खड्ग हाथ खप्पर धारिणी। असुरों की तू संहारिणी॥
शवासन पर नृत्य करती। शिव पर थिरकती प्रेम जगाती॥
रक्तबीज पिया जब माँ ने। दुष्टों का विनाश कर डाला॥
चण्ड मुण्ड का सिर काटा। अहंकार का घमण्ड छाँटा॥
शुम्भ निशुम्भ संहार किया। जग को पापों से मुक्त किया॥
देवी महात्म्य में वर्णित। माँ काली का चरित पवित्र॥
नवरात्र में पूजन होता। काली भक्त मन में रोता॥
सप्तमी में माँ की पूजा। बली का चढ़ावा है भूजा॥
जो माँ काली को भजे। उसके सब संकट मिट जायें॥
लाल पुष्प और काले तिल। काली माँ को हैं अतिप्रिय॥
शनिवार को ध्यान लगाओ। काली माँ का प्रसाद पाओ॥
चालीसा पाठ करे जो नित्य। पावे माँ का आशीष पवित्र॥

॥ दोहा ॥
काली माँ की शरण में आया भक्त अनन्य।
जन्म मरण के चक्र से छूटे होय धन्य॥

— स्रोत: देवी महात्म्यम् एवं काली परम्परा आधारित

श्री काली चालीसा (दुर्गासप्तशती आधारित) — कब पढ़ें

माँ काली की आराधना का दिन शनिवार है — अगला शनिवार, 22 अगस्त को।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।

अगला संबंधित व्रत

माँ काली से जुड़ा अगला व्रत — मासिक दुर्गाष्टमी, गुरुवार, 20 अगस्त (2 दिन बाद)।

माँ काली के अन्य पाठ