श्री काली बीज एवं मन्त्र-संग्रह
माँ काली · Kali · मंत्र
श्री काली बीज एवं मन्त्र-संग्रह के बोल
॥ श्री काली बीज / मन्त्र-संग्रह ॥
【 एकाक्षरी बीज मन्त्र 】
क्रीं॥
("क्रीं" काली का बीजाक्षर है)
【 त्र्यक्षरी मन्त्र 】
क्रीं क्रीं क्रीं॥
【 काली महामन्त्र (दक्षिणकालिका) 】
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रूं ह्रूं
दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं
ह्रीं ह्रीं ह्रूं ह्रूं स्वाहा॥
【 काली गायत्री मन्त्र 】
ॐ महाकाल्यै च विद्महे, श्मशानवासिन्यै च धीमहि।
तन्नो काली प्रचोदयात्॥
【 प्रचलित सरल मन्त्र 】
ॐ क्रीं कालिकायै नमः॥
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥ (नवार्ण मन्त्र — दुर्गा सप्तशती)
श्री काली बीज एवं मन्त्र-संग्रह — कब पढ़ें
माँ काली की आराधना का दिन शनिवार है — अगला शनिवार, 22 अगस्त को।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
अगला संबंधित व्रत
माँ काली से जुड़ा अगला व्रत — मासिक दुर्गाष्टमी, गुरुवार, 20 अगस्त (2 दिन बाद)।
माँ काली मंत्र जप की विधि
जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; माँ काली की आराधना का वार शनिवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
माला: **रुद्राक्ष अथवा लाल चन्दन** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।
जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।