महाकाली स्तोत्र (देवी महात्म्यम्)
माँ काली · Kali · स्तोत्र
महाकाली स्तोत्र (देवी महात्म्यम्) के बोल
या देवी सर्वभूतेषु कालीरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भूतानां चाखिलेषु या।
भूतेषु सततं तस्यै व्याप्तिदेव्यै नमो नमः॥
चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद् व्याप्य स्थिता जगत्।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
— स्रोत: देवी महात्म्यम् (मार्कण्डेय पुराण) — देवी स्तुति
महाकाली स्तोत्र (देवी महात्म्यम्) — कब पढ़ें
माँ काली की आराधना का दिन शनिवार है — अगला शनिवार, 10 अक्टूबर को।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
अगला संबंधित व्रत
माँ काली से जुड़ा अगला व्रत — मासिक दुर्गाष्टमी, सोमवार, 19 अक्टूबर (10 दिन बाद)।
माँ काली मंत्र जप की विधि
जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; माँ काली की आराधना का वार शनिवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
माला: **रुद्राक्ष अथवा लाल चन्दन** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।
जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।