महालक्ष्म्यष्टकम् (इन्द्रकृत)

माँ लक्ष्मी · Lakshmi · स्तोत्र

महालक्ष्म्यष्टकम् (इन्द्रकृत) — माँ लक्ष्मी

महालक्ष्म्यष्टकम् (इन्द्रकृत) के बोल

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयंकरि।
सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयंकरि।
सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि।
मंत्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि।
योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्तिमहोदरे।
महापापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि।
परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

श्वेताम्बरधरे देवि नानालंकारभूषिते।
जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

महालक्ष्म्यष्टकस्तोत्रं यः पठेद् भक्तिमान् नरः।
सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा॥

— स्रोत: परम्परागत (Traditional)

महालक्ष्म्यष्टकम् (इन्द्रकृत) — कब पढ़ें

माँ लक्ष्मी की आराधना का दिन शुक्रवार है — अगला शुक्रवार, 21 अगस्त को।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।

शुक्र की वर्तमान स्थिति

शुक्र इस समय कन्या राशि में हैं, और 2 सित॰ 2026 को तुला राशि में प्रवेश करेंगे।

ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।

अगला संबंधित व्रत

माँ लक्ष्मी से जुड़ा अगला व्रत — पूर्णिमा, शुक्रवार, 28 अगस्त (10 दिन बाद)।

माँ लक्ष्मी मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; माँ लक्ष्मी की आराधना का वार शुक्रवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।

माला: **कमलगट्टा अथवा स्फटिक** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

माँ लक्ष्मी के अन्य पाठ