श्री साईनाथ महिमा स्तोत्र
साईं बाबा · Sai Baba · स्तोत्र
श्री साईनाथ महिमा स्तोत्र के बोल
सदा सत्स्वरूपं चिदानन्दकन्दं
जगत्व्यापकं निर्मलं निर्गुणं त्वाम्।
नमामीश्वरं सद्गुरुं साईनाथं
भवाम्बोधिमग्नार्दितानां जनानाम्॥
भवाम्बोधिमग्नार्दितानां जनानां
स्वपादाश्रितानां स्वभक्तिप्रियाणाम्।
समुद्धारणार्थं कलौ सम्भवन्तं
नमामीश्वरं सद्गुरुं साईनाथम्॥
सदा निम्बवृक्षस्य मूलाधिवासात्
सुधास्त्रावितं तिक्तमप्यप्रियं तत्।
तरुं कल्पवृक्षाधिकं साधयन्तं
नमामीश्वरं सद्गुरुं साईनाथम्॥
सदा कल्पवृक्षस्य तस्याधिमूले
भवद्भावबुद्ध्या सपर्याधिसेवाम्।
नृणां कुर्वतां भुक्तिमुक्तिप्रदं तं
नमामीश्वरं सद्गुरुं साईनाथम्॥
अजन्माद्यमेकं परं ब्रह्म साक्षात्
स्वयं सम्भवं रामेवावतीर्णम्।
भवद्दर्शनात् सम्पुनीतः प्रभोऽहं
नमामीश्वरं सद्गुरुं साईनाथम्॥
— स्रोत: श्री साई सत्चरित — हेमाडपन्त (अन्नासाहेब दाभोलकर) रचित — साई महिमा स्तोत्र
श्री साईनाथ महिमा स्तोत्र — कब पढ़ें
साईं बाबा की आराधना का दिन गुरुवार है — अगला गुरुवार, 20 अगस्त को।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
साईं बाबा मंत्र जप की विधि
जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; साईं बाबा की आराधना का वार गुरुवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।