श्रीशिवरामाष्टकस्तोत्रम् (रामानन्द)

भगवान शिव · Shiva · स्तोत्र

श्रीशिवरामाष्टकस्तोत्रम् (रामानन्द) — भगवान शिव

श्रीशिवरामाष्टकस्तोत्रम् (रामानन्द) के बोल

शिव हरे शिव राम सखे प्रभो त्रिविधतापनिवारण हे विभो।
अज जनेश्वर यादव पाहि मां शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्॥
कमललोचन राम दयानिधे हर गुरो गजरक्षक गोपते।
शिवतनो भव शङ्कर पाहि मां शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्॥
सुजनरञ्जन मङ्गलमन्दिरं भजति ते पुरुषः परमं पदम्।
भवति तस्य सुखं परमद्भुतं शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्॥
जय युधिष्ठिरवल्लभ भूपते जय जयार्जितपुण्यपयोनिधे।
जय कृपामय कृष्ण नमोऽस्तु ते शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्॥
भवविमोचन माधव मापते सुकविमानसहंस शिवारते।
जनकजारत राघव रक्ष मां शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्॥
अवनिमण्डलमङ्गल मापते जलदसुन्दर राम रमापते।
निगमकीर्तिगुणार्णव गोपते शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्॥
पतितपावन नाममयी लता तव यशो विमलं परिगीयते।
तदपि माधव मां किमुपेक्षसे शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्॥
अमरतापरदेव रमापते विजयतस्तव नामधनोपमा।
मयि कथं करुणार्णव जायते शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्॥
हनुमतः प्रिय चापकर प्रभो सुरसरिद्धृतशेखर हे गुरो।
मम विभो किमु विस्मरणं कृतं शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्॥
अहरहर्जनरञ्जनसुन्दरं पठति यः शिवरामकृतं स्तवम्।
विशति रामरमाचरणाम्बुजे शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्॥
प्रातरुत्थाय यो भक्त्या पठेदेकाग्रमानसः।
विजयो जायते तस्य विष्णुमाराध्यमाप्नुयात्॥

— स्रोत: गीताप्रेस, स्तोत्ररत्नावली, पृष्ठ 265-267

श्रीशिवरामाष्टकस्तोत्रम् (रामानन्द) — कब पढ़ें

भगवान शिव की आराधना का दिन सोमवार है — अगला सोमवार, 19 अक्टूबर को।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।

अगला संबंधित व्रत

भगवान शिव से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल प्रदोष, शुक्रवार, 23 अक्टूबर (6 दिन बाद)।

अन्य: मासिक शिवरात्रि — शनिवार, 7 नवंबर।

भगवान शिव मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; भगवान शिव की आराधना का वार सोमवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।

माला: **रुद्राक्ष** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

भगवान शिव के अन्य पाठ