बुधवार — गणेश जी की आराधना

मंत्र · व्रत · दान · उपाय

बुधवार के मंत्र

गणेश मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः

बुध बीज मंत्र: ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः

(108 बार जप विशेष फलदायी)

पाठ व पूजा

गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ व दूर्वा अर्पण।

व्रत

बुधवार व्रत — बुद्धि, व्यापार व वाणी हेतु।

दान व शुभ रंग

दानमूँग व हरे वस्त्र का दान
शुभ रंगहरा

बुधवार के स्वामी ग्रह इस समय कहाँ हैं

बुधवार का स्वामी ग्रह बुध है, और इस समय वे तुला राशि में हैं। 2 दिस॰ 2026 को ये वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे।

जिस वार की पूजा की जाती है, उसका फल उस वार के स्वामी की गोचर-स्थिति से भी जुड़ा रहता है — इसीलिए बुधवार के उपाय करते समय बुध की वर्तमान स्थिति देख लेना उचित होता है। यह स्थिति निरयन (लाहिरी) गणना से निकाली गई है और प्रतिदिन बदलती है।

अगला बुधवार — 14 अक्टूबर 2026

सूर्योदय06:21
सूर्यास्त17:52
राहुकाल12:07 – 13:33
यमगण्ड07:47 – 09:14
गुलिक काल10:40 – 12:07
अभिजीत मुहूर्तबुधवार को विधान नहीं
ब्रह्म मुहूर्त04:45 – 05:33

बुधवार का व्रत व पूजा ब्रह्म मुहूर्त अथवा प्रातःकाल में आरंभ करना श्रेष्ठ है। राहुकाल में नया संकल्प न लें — नित्य जप व पूजा तब भी निर्बाध चलती है। इस दिन शुभ चौघड़िया: लाभ 06:21–07:47, अमृत 07:47–09:14, शुभ 10:40–12:07, लाभ 16:26–17:52। (नई दिल्ली के सूर्योदय पर — अपने शहर का समय देखें।)

बुधवार को पड़ने वाले आगामी व्रत

  • शुक्ल पक्ष एकादशी — बुधवार, 17 फ़रवरी 2027
  • शुक्ल प्रदोष — बुधवार, 20 जनवरी 2027
  • पूर्णिमा — बुधवार, 23 दिसंबर 2026

ये तिथियाँ खगोलीय गणना से निकाली गई हैं। पूरा व्रत कैलेंडर देखें।

बुधवार व्रत की विधि

प्रातः स्नान कर गणेश जी का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ व दूर्वा अर्पण।

दिन भर फलाहार अथवा एक समय सात्विक भोजन का विधान है; हरा रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। संध्या-काल में दीपक जलाकर ॐ गं गणपतये नमः का जप करें — कम से कम एक माला (108 बार)।

व्रत के अंत में मूँग व हरे वस्त्र का दान करने का विधान है। व्रत की संख्या (5, 11, 16 अथवा 21 बुधवार) संकल्प के अनुसार तय की जाती है, और अंतिम बुधवार को उद्यापन किया जाता है।

संबंधित पाठ व पर्व