शनिवार — शनि देव / हनुमान जी की आराधना
मंत्र · व्रत · दान · उपाय
शनिवार के मंत्र
शनि मंत्र: ॐ शं शनैश्चराय नमः
शनि बीज मंत्र: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
(108 बार जप विशेष फलदायी)
पाठ व पूजा
हनुमान चालीसा का पाठ व पीपल पर जल।
व्रत
शनिवार व्रत — शनि-कृपा, साढ़ेसाती/ढैया शांति हेतु।
दान व शुभ रंग
| दान | तिल-तेल, उड़द, लोहा व काले वस्त्र का दान |
|---|---|
| शुभ रंग | काला / नीला |
शनिवार के स्वामी ग्रह इस समय कहाँ हैं
शनिवार का स्वामी ग्रह शनि है, और इस समय वे मीन राशि में वक्री अवस्था में हैं। 3 जून 2027 को ये मेष राशि में प्रवेश करेंगे।
जिस वार की पूजा की जाती है, उसका फल उस वार के स्वामी की गोचर-स्थिति से भी जुड़ा रहता है — इसीलिए शनिवार के उपाय करते समय शनि की वर्तमान स्थिति देख लेना उचित होता है। यह स्थिति निरयन (लाहिरी) गणना से निकाली गई है और प्रतिदिन बदलती है।
अगला शनिवार — 10 अक्टूबर 2026
| सूर्योदय | 06:18 |
|---|---|
| सूर्यास्त | 17:57 |
| राहुकाल | 09:13 – 10:40 |
| यमगण्ड | 13:35 – 15:02 |
| गुलिक काल | 06:18 – 07:46 |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:44 – 12:31 |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:42 – 05:30 |
शनिवार का व्रत व पूजा ब्रह्म मुहूर्त अथवा प्रातःकाल में आरंभ करना श्रेष्ठ है। राहुकाल में नया संकल्प न लें — नित्य जप व पूजा तब भी निर्बाध चलती है। इस दिन शुभ चौघड़िया: शुभ 07:46–09:13, लाभ 13:35–15:02, अमृत 15:02–16:29। (नई दिल्ली के सूर्योदय पर — अपने शहर का समय देखें।)
शनि प्रदोष — अगली तिथि
शनिवार का प्रदोष संतान-प्राप्ति व शनि-शांति हेतु विशेष माना जाता है।
- शुक्ल प्रदोष — शनिवार, 20 मार्च 2027
ये तिथियाँ खगोलीय गणना से निकाली गई हैं। पूरा व्रत कैलेंडर देखें।
शनिवार व्रत की विधि
प्रातः स्नान कर शनि देव / हनुमान जी का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। हनुमान चालीसा का पाठ व पीपल पर जल।
दिन भर फलाहार अथवा एक समय सात्विक भोजन का विधान है; काला / नीला रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। संध्या-काल में दीपक जलाकर ॐ शं शनैश्चराय नमः का जप करें — कम से कम एक माला (108 बार)।
व्रत के अंत में तिल-तेल, उड़द, लोहा व काले वस्त्र का दान करने का विधान है। व्रत की संख्या (5, 11, 16 अथवा 21 शनिवार) संकल्प के अनुसार तय की जाती है, और अंतिम शनिवार को उद्यापन किया जाता है।
संबंधित पाठ व पर्व
- शनि देव — सभी पाठ — देवता
- हनुमान जी — सभी पाठ — देवता
- श्री शनि चालीसा — चालीसा
- जय जय श्री शनिदेव — आरती — आरती
- दशरथकृत शनि स्तुति — स्तोत्र
- श्री हनुमान चालीसा — चालीसा
- शनि ग्रह — ग्रह
- शनि की साढ़ेसाती — ज्योतिष