श्री शनिदेव जी की आरती (जय जय श्री शनिदेव)

शनि देव · Shani · आरती

श्री शनिदेव जी की आरती (जय जय श्री शनिदेव) — शनि देव

श्री शनिदेव जी की आरती (जय जय श्री शनिदेव) के बोल

॥ श्री शनिदेव जी की आरती ॥

जय जय श्री शनिदेव, भक्तन हितकारी।
सूरज के पुत्र प्रभु, छाया महतारी॥
॥ जय जय श्री शनिदेव ॥

श्याम अंग वक्र-दृष्टि, चतुर्भुजा धारी।
नीलाम्बर धार नाथ, गज की असवारी॥
॥ जय जय श्री शनिदेव ॥

क्रीट मुकुट शीश राजित, दिपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले, शोभित बलिहारी॥
॥ जय जय श्री शनिदेव ॥

मोदक मिष्ठान पान, चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द, महिषी अति प्यारी॥
॥ जय जय श्री शनिदेव ॥

देव दनुज ऋषि मुनि, सुमिरत नर नारी।
"विश्वनाथ" धरत ध्यान, शरण हैं तुम्हारी॥

जय जय श्री शनिदेव, भक्तन हितकारी।
सूरज के पुत्र प्रभु, छाया महतारी॥

श्री शनिदेव जी की आरती (जय जय श्री शनिदेव) — कब पढ़ें

शनि देव की आराधना का दिन शनिवार है — अगला शनिवार, 22 अगस्त को।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।

शनि की वर्तमान स्थिति

शनि इस समय मीन राशि में (वक्री) हैं, और 3 जून 2027 को मेष राशि में प्रवेश करेंगे।

इस समय मेष, मीन, कुम्भ राशि पर साढ़ेसाती तथा धनु, सिंह राशि पर ढैया चल रही है।

ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।

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