सोमवार — भगवान शिव की आराधना

मंत्र · व्रत · दान · उपाय

सोमवार के मंत्र

पंचाक्षरी मंत्र: ॐ नमः शिवाय

महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

(108 बार जप विशेष फलदायी)

पाठ व पूजा

शिव अभिषेक (जल/दूध) व शिव चालीसा।

व्रत

सोमवार व्रत — मनोकामना-पूर्ति व चन्द्र-दोष शांति हेतु।

दान व शुभ रंग

दानदूध, चावल व श्वेत वस्त्र का दान
शुभ रंगश्वेत

सोमवार के स्वामी ग्रह इस समय कहाँ हैं

सोमवार का स्वामी ग्रह चन्द्र है, और इस समय वे कन्या राशि में हैं। 11 अक्टू॰ 2026 को ये तुला राशि में प्रवेश करेंगे।

जिस वार की पूजा की जाती है, उसका फल उस वार के स्वामी की गोचर-स्थिति से भी जुड़ा रहता है — इसीलिए सोमवार के उपाय करते समय चन्द्र की वर्तमान स्थिति देख लेना उचित होता है। यह स्थिति निरयन (लाहिरी) गणना से निकाली गई है और प्रतिदिन बदलती है।

अगला सोमवार — 12 अक्टूबर 2026

सूर्योदय06:20
सूर्यास्त17:54
राहुकाल07:46 – 09:13
यमगण्ड10:40 – 12:07
गुलिक काल13:34 – 15:01
अभिजीत मुहूर्त11:44 – 12:30
ब्रह्म मुहूर्त04:44 – 05:32

सोमवार का व्रत व पूजा ब्रह्म मुहूर्त अथवा प्रातःकाल में आरंभ करना श्रेष्ठ है। राहुकाल में नया संकल्प न लें — नित्य जप व पूजा तब भी निर्बाध चलती है। इस दिन शुभ चौघड़िया: अमृत 06:20–07:46, शुभ 09:13–10:40, लाभ 15:01–16:28, अमृत 16:28–17:54। (नई दिल्ली के सूर्योदय पर — अपने शहर का समय देखें।)

सोम प्रदोष — अगली तिथि

सोमवार का प्रदोष व्रत शिव-आराधना हेतु विशेष फलदायी कहा गया है।

  • शुक्ल प्रदोष — सोमवार, 21 दिसंबर 2026

ये तिथियाँ खगोलीय गणना से निकाली गई हैं। पूरा व्रत कैलेंडर देखें।

सोमवार व्रत की विधि

प्रातः स्नान कर भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। शिव अभिषेक (जल/दूध) व शिव चालीसा।

दिन भर फलाहार अथवा एक समय सात्विक भोजन का विधान है; श्वेत रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। संध्या-काल में दीपक जलाकर ॐ नमः शिवाय का जप करें — कम से कम एक माला (108 बार)।

व्रत के अंत में दूध, चावल व श्वेत वस्त्र का दान करने का विधान है। व्रत की संख्या (5, 11, 16 अथवा 21 सोमवार) संकल्प के अनुसार तय की जाती है, और अंतिम सोमवार को उद्यापन किया जाता है।

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