श्री शनि चालीसा (नवग्रह परम्परा)
शनि देव · Shani · चालीसा
श्री शनि चालीसा (नवग्रह परम्परा) के बोल
॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन शारद सुवन कृपाल।
विनय करों शनिदेव की छाया की सन्तान॥
॥ चौपाई ॥
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
श्याम अंग वक्र दृष्टि चतुर्भुज धारी। नीलाम्बर धार नाथ गृध्रासन सवारी॥
कृष्णेन्द्र छाया पुत्र कहलावत नित। सूर्य पुत्र भ्राता यम सब जानत मित॥
दशरथ राजा ने जब स्तुति की तेरी। शनि ने की उन पर कृपा भारी॥
महाभारत में जो कर्मफल दिया। पाण्डव कौरव सबको भाग्य दिया॥
न्याय मार्ग से जो चले जग में। शनि देव की कृपा उन्हें मिले सदा॥
जो भजे एकाग्र शनि देव को। वो पावे सुख शान्ति अखण्ड को॥
काले तिल तेल लोहे का दान। शनि पीड़ा से मिले छुटकारा शान॥
शनिवार को व्रत करे जो नर। पीपल पर जल दे नित्य उठकर॥
साढ़ेसाती ढैय्या जब आवे। शनि के नाम का जाप मनावे॥
नवग्रह में शनि सबसे न्यायी। कर्मफलद इनकी महिमाई॥
चालीसा पाठ करे जो नित्य। शनि कृपा पावे वो पवित्र॥
॥ दोहा ॥
शनि देव की शरण में जो आवे भक्त हरिदास।
न्याय धर्म से जीवन जिए पावे नित्य विकास॥
— स्रोत: नवग्रह उपासना परम्परा — शनि चालीसा
श्री शनि चालीसा (नवग्रह परम्परा) — कब पढ़ें
शनि देव की आराधना का दिन शनिवार है — अगला शनिवार, 22 अगस्त को।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
शनि की वर्तमान स्थिति
शनि इस समय मीन राशि में (वक्री) हैं, और 3 जून 2027 को मेष राशि में प्रवेश करेंगे।
इस समय मेष, मीन, कुम्भ राशि पर साढ़ेसाती तथा धनु, सिंह राशि पर ढैया चल रही है।
ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।