कृष्ण जन्माष्टमी 2026 — शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
Krishna Janmashtami · भाद्रपद मास · बीत चुका
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 कब है?
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 में शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को है।
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी — भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव; निशीथ काल (मध्यरात्रि) में जन्म-आरती।
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 — पूजा का शुभ समय
| सूर्योदय | 06:00 |
|---|---|
| सूर्यास्त | 18:39 |
| निशीथ काल (मुख्य पूजा) | 23:56 – 00:44 |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:54 – 12:45 |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:24 – 05:12 |
| राहुकाल (टालें) | 10:45 – 12:20 |
| व्रत पारण | 06:01 के पश्चात् (5 सितंबर 2026) |
समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर गणना किए गए हैं — अपने शहर का समय देखें। यह गणना खगोलीय है, किसी संग्रहीत सारणी से नहीं ली गई — और प्रचलित पंचांगों से मिलाकर जाँची गई है (गणना-सत्यापित)।
चार प्रहर की पूजा का समय
| प्रथम प्रहर | 18:39 – 21:29 |
|---|---|
| द्वितीय प्रहर | 21:29 – 00:20 |
| तृतीय प्रहर | 00:20 – 03:10 |
| चतुर्थ प्रहर | 03:10 – 06:01 |
रात्रि सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक चार बराबर प्रहरों में बाँटी जाती है, और प्रत्येक प्रहर में अभिषेक व पूजा का विधान है। जागरण करने वाले चारों प्रहर की पूजा करते हैं; एक ही बार करना हो तो निशीथ काल श्रेष्ठ है — वही वह क्षण है जिसमें यह पर्व प्रतिष्ठित है।
कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के नियम व विधि
व्रत मध्यरात्रि तक रखा जाता है, क्योंकि श्रीकृष्ण का जन्म निशीथ काल में हुआ था। दिन भर फलाहार अथवा निर्जल रहकर मध्यरात्रि में बाल-गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाता है — पंचामृत से अभिषेक, झूला-सज्जा, माखन-मिश्री व धनिया-पंजीरी का भोग। जन्म के पश्चात् आरती करके ही व्रत खोला जाता है।
संबंधित पाठ व पर्व
- भगवान कृष्ण — सभी पाठ — देवता
- आरती कुंज बिहारी की — आरती
- श्री कृष्ण चालीसा — चालीसा
- एकादशी व्रत — व्रत
कृष्ण जन्माष्टमी — आने वाले वर्षों की तिथियाँ
| 2025 | शुक्रवार, 15 अगस्त 2025 |
|---|---|
| 2026 | शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 |
| 2027 | मंगलवार, 24 अगस्त 2027 |
| 2028 | रविवार, 13 अगस्त 2028 |
| 2029 | शुक्रवार, 31 अगस्त 2029 |
कृष्ण जन्माष्टमी की विधि, सामग्री व कथा
पूजा-विधि, सामग्री, कथा तथा क्षेत्रीय परम्पराएँ हर वर्ष एक ही रहती हैं — वे कृष्ण जन्माष्टमी के मुख्य पृष्ठ पर एक ही जगह दी गई हैं। यह पृष्ठ केवल 2026 का बताता है: तिथि, वार व उस दिन का अपना काल।