सूर्य का विशाखा नक्षत्र में गोचर (6–20 नवंबर 2026)

सूर्य शुक्रवार 6 नवंबर 2026 (धनतेरस) की रात लगभग 21:01 पर विशाखा नक्षत्र में प्रवेश करेगा और 20 नवंबर 2026 को लगभग 03:01 तक इसी नक्षत्र में रहेगा — यानी लगभग 13 दिन 6 घंटे। इस बीच 16 नवंबर 19:41 पर सूर्य तुला से वृश्चिक राशि में भी जाएगा, इसलिए यह गोचर दो चरणों में देखा जाना चाहिए।

एक नज़र में

विशाखा में प्रवेशशुक्रवार, 6 नवंबर 2026, लगभग 21:01
राशि-परिवर्तनतुला से वृश्चिक, 16 नवंबर 2026, 19:41
अनुराधा में प्रवेशशुक्रवार, 20 नवंबर 2026, लगभग 03:01
अवधिलगभग 13 दिन 6 घंटे
नक्षत्र स्वामीगुरु (बृहस्पति)

सीधा उत्तर: सूर्य विशाखा में कब से कब तक?

हमारी पंचांग-गणना (निरयन, लाहिड़ी अयनांश) के अनुसार सूर्य 24 अक्टूबर से स्वाती नक्षत्र में है और 6 नवंबर 2026 को लगभग 21:01 पर विशाखा नक्षत्र में प्रवेश करेगा। यह समय धनतेरस की रात का है, प्रदोष काल (17:32–20:09) समाप्त होने के बाद। सूर्य 20 नवंबर 2026 को लगभग 03:01 पर अनुराधा नक्षत्र में चला जाएगा।

विशाखा नक्षत्र क्या है?

विशाखा 27 नक्षत्रों में 16वाँ नक्षत्र है। इसका विस्तार तुला राशि के 20° से वृश्चिक राशि के 3°20' तक है — अर्थात् इसके पहले तीन चरण तुला में और अन्तिम चरण वृश्चिक में पड़ता है। यही कारण है कि सूर्य इस नक्षत्र में रहते-रहते राशि भी बदल लेता है।

  • स्वामी ग्रह: गुरु (बृहस्पति) — ज्ञान, धर्म और मार्गदर्शन का कारक।
  • देवता: इन्द्र और अग्नि (इन्द्राग्नि) — इन्द्र नेतृत्व और विजय के, अग्नि तेज़ और शुद्धि के प्रतीक।
  • प्रतीक: तोरण (विजय-द्वार), और कई परम्पराओं में कुम्हार का चाक — लगातार परिश्रम से मिट्टी को आकार देने का भाव।
  • स्वभाव: इसे लक्ष्य-सिद्धि का नक्षत्र कहा जाता है — एक उद्देश्य तय करके धैर्य से उस पर टिके रहना इसकी पहचान है।

सूर्य आत्मा, पिता, अधिकार और आत्मविश्वास का कारक है। जब वह गुरु-स्वामित्व वाले और इन्द्र-अग्नि देवता वाले इस नक्षत्र से गुज़रता है, तो परम्परा में यह समय अपने लक्ष्य को स्पष्ट करने, अनुशासन बढ़ाने और धर्म-कर्म में मन लगाने के लिए उपयुक्त माना जाता है।

दो चरण: तुला-विशाखा और वृश्चिक-विशाखा

चरणअवधिसूर्य की स्थिति
पहला चरण6 नवंबर लगभग 21:01 से 16 नवंबर 19:41तुला राशि (सूर्य की नीच राशि) में, विशाखा नक्षत्र
दूसरा चरण16 नवंबर 19:41 से 20 नवंबर लगभग 03:01वृश्चिक राशि (मित्र मंगल की राशि) में, विशाखा नक्षत्र

आरती संग्रह पंचांग-गणना, निरयन (लाहिड़ी), भारतीय मानक समय।

पहले चरण में सूर्य अपनी नीच राशि तुला में है, इसलिए अहंकार की जगह विनम्रता और सहयोग अधिक काम आएँगे। 16 नवंबर की शाम से वृश्चिक में आने पर सूर्य की स्थिति अपेक्षाकृत सहज मानी जाती है। ध्यान दें, छठ महापर्व के दोनों अर्घ्य — रविवार 15 नवंबर का संध्या अर्घ्य और सोमवार 16 नवंबर का उषा अर्घ्य — इसी विशाखा-गोचर के पहले चरण में, जब सूर्य तुला में है, पड़ते हैं। संध्या अर्घ्य रविवार को है, जो स्वयं सूर्य देव का वार है।

चन्द्र राशि अनुसार संकेत — दोनों चरणों के भाव

शास्त्रीय गोचर नियम में भाव अपनी चन्द्र राशि से गिने जाते हैं, और सूर्य के लिए 3, 6, 10 और 11वाँ भाव अनुकूल माने गए हैं। नीचे हर राशि के लिए दोनों चरणों के भाव दिए गए हैं: दोनों अनुकूल हों तो 'अनुकूल', एक अनुकूल हो तो 'मिश्र', कोई नहीं तो 'सावधानी'।

चन्द्र राशिभाव (तुला चरण → वृश्चिक चरण)संकेत व सरल उपाय
मेष7 → 8सावधानी — साझेदारी और स्वास्थ्य दोनों में संयम रखें, विवाद टालें। उपाय: प्रातः सूर्य अर्घ्य।
वृषभ6 → 7मिश्र — 16 नवंबर तक कार्य और प्रतियोगिता में सहयोग, उसके बाद दाम्पत्य में धैर्य रखें। उपाय: रविवार को गुड़ का दान।
मिथुन5 → 6मिश्र — आरम्भ में पढ़ाई व सन्तान-विषयों में धीमापन, 16 नवंबर के बाद कार्य-व्यवस्था में सुधार के संकेत। उपाय: आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ।
कर्क4 → 5सावधानी — घर की शान्ति और मन की स्थिरता का ध्यान रखें; निवेश में जल्दबाज़ी न करें। उपाय: माता का आशीर्वाद और सूर्य अर्घ्य।
सिंह3 → 4मिश्र — पहले चरण में साहस और प्रयास फलदायी, बाद में घरेलू विषयों में धैर्य रखें। उपाय: रविवार को गेहूँ का दान।
कन्या2 → 3मिश्र — आरम्भ में वाणी और परिवार-खर्च में संयम, 16 नवंबर के बाद प्रयासों में सफलता के संकेत। उपाय: सूर्य देव को अर्घ्य।
तुला1 → 2सावधानी — थकान और चिड़चिड़ापन सम्भव; वाणी व खर्च पर नियन्त्रण रखें। उपाय: आदित्य हृदय स्तोत्र और प्रातः अर्घ्य।
वृश्चिक12 → 1सावधानी — पहले नींद और व्यय पर ध्यान, फिर सूर्य आपकी राशि पर — स्वास्थ्य और क्रोध का ध्यान रखें। उपाय: रविवार को गुड़-गेहूँ दान।
धनु11 → 12मिश्र — 16 नवंबर तक लाभ और मित्र-सहयोग के संकेत, उसके बाद खर्च व यात्रा में सजगता। उपाय: सूर्य अर्घ्य।
मकर10 → 11अनुकूल — कार्यक्षेत्र में पहचान और लाभ, दोनों चरणों में सहयोग के संकेत; विनम्रता बनाए रखें। उपाय: रविवार को सूर्य देव की आरती।
कुम्भ9 → 10मिश्र — आरम्भ में पिता व गुरुजनों के साथ धैर्य, 16 नवंबर के बाद कार्यक्षेत्र में उन्नति के संकेत। उपाय: बड़ों का आशीर्वाद, सूर्य अर्घ्य।
मीन8 → 9सावधानी — स्वास्थ्य और अचानक खर्च पर सजग रहें; धर्म-कार्य में मन लगाएँ। उपाय: आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ।

भाव = चन्द्र राशि से गिनकर सूर्य का भाव (6–16 नवंबर तुला, 16–20 नवंबर वृश्चिक)। यह सामान्य संकेत है, व्यक्तिगत फल नहीं।

किसे अधिक सावधानी रखनी चाहिए?

चन्द्र राशि के अनुसार मेष, कर्क, तुला, वृश्चिक और मीन राशि वालों के लिए दोनों चरणों में सूर्य अनुकूल भाव में नहीं है। इसका अर्थ भय नहीं, बल्कि यह संकेत है कि इन दिनों स्वास्थ्य, नींद, क्रोध और बड़ों के साथ व्यवहार में थोड़ा अधिक ध्यान रखें। जिन लोगों की जन्म-कुंडली में सूर्य पहले से दुर्बल है, या जिनकी सूर्य की दशा-अन्तर्दशा चल रही है, उन्हें भी इस समय नियमित अर्घ्य और संयमित दिनचर्या लाभ देगी।

विशाखा में सूर्य का यह गोचर आपकी अपनी कुंडली में किस भाव को छू रहा है — अपने जन्म-विवरण से पूछिए। अपनी कुंडली से पूछें

सरल उपाय — सूर्य देव की उपासना

  1. रविवार को सूर्य अर्घ्य: प्रातः स्नान के बाद ताँबे के लोटे में जल, थोड़ा रोली, अक्षत और लाल पुष्प डालकर उगते सूर्य देव को अर्घ्य दें। इस अवधि में 8 और 15 नवंबर दो रविवार पड़ते हैं।
  2. आदित्य हृदय स्तोत्र: वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड में वर्णित यह स्तोत्र सूर्य उपासना का प्रसिद्ध पाठ है। प्रातः श्रद्धा से इसका पाठ या श्रवण करें।
  3. गुड़ और गेहूँ का दान: रविवार को अपनी सामर्थ्य अनुसार किसी ज़रूरतमन्द को गुड़ और गेहूँ दें।
  4. छठ के अर्घ्य: जो परिवार छठ महापर्व मनाते हैं, उनके लिए 15 नवंबर का संध्या अर्घ्य और 16 नवंबर का उषा अर्घ्य इस गोचर-काल की सबसे सुन्दर सूर्य-उपासना है। घाट पर जल की गहराई, भीड़ और बच्चों का विशेष ध्यान रखें।
  5. व्यवहार का उपाय: पिता व बड़ों का सम्मान, समय पर उठना और अपने लक्ष्य के लिए रोज़ एक छोटा, नियमित कदम — यही विशाखा के 'लक्ष्य-सिद्धि' स्वभाव के अनुरूप उपाय है।

सूर्य देव की आरती और सूर्य चालीसा का पाठ भी इन दिनों किया जा सकता है। उपाय मन को स्थिर रखने और कर्म को शुद्ध करने के लिए हैं; किसी डर से नहीं, श्रद्धा से करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूर्य विशाखा नक्षत्र में कब प्रवेश करेगा?

सूर्य शुक्रवार 6 नवंबर 2026 (धनतेरस) की रात लगभग 21:01 पर विशाखा नक्षत्र में प्रवेश करेगा। यह धनतेरस के प्रदोष काल के बाद का समय है।

सूर्य विशाखा में कितने दिन रहेगा?

सूर्य 20 नवंबर 2026 को लगभग 03:01 तक विशाखा में रहेगा, यानी लगभग 13 दिन 6 घंटे। '14 दिन' कहना मोटा अनुमान है।

विशाखा नक्षत्र का स्वामी और देवता कौन है?

विशाखा का स्वामी ग्रह गुरु (बृहस्पति) है और इसके देवता इन्द्र व अग्नि हैं। इसका प्रतीक तोरण (विजय-द्वार) है, और कई परम्पराएँ कुम्हार का चाक भी मानती हैं।

सूर्य वृश्चिक राशि में कब जाएगा?

सूर्य 16 नवंबर 2026 को 19:41 पर तुला से वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा, जबकि नक्षत्र विशाखा ही बना रहेगा।

क्या छठ पूजा इसी गोचर में है?

हाँ। छठ का संध्या अर्घ्य रविवार 15 नवंबर और उषा अर्घ्य सोमवार 16 नवंबर को है — दोनों विशाखा-गोचर के पहले चरण में, जब सूर्य तुला में है।

संदर्भ

फलदीपिका (गोचर प्रकरण) · बृहत् पाराशर होरा शास्त्र · वाल्मीकि रामायण (युद्धकाण्ड — आदित्य हृदय स्तोत्र) · आरती संग्रह पंचांग-गणना (नई दिल्ली)

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