दीपोत्सव 2026: रमा एकादशी से भाई दूज तक हर दिन की तिथि और समय

दीपोत्सव 2026 में धनतेरस शुक्रवार 6 नवंबर, दीपावली रविवार 8 नवंबर, गोवर्धन पूजा मंगलवार 10 नवंबर और भाई दूज बुधवार 11 नवंबर को है। इस वर्ष नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान और दीपावली दोनों 8 नवंबर को पड़ रहे हैं, जबकि काली चौदस की रात्रि-पूजा 7 नवंबर को होगी; उससे पहले 5 नवंबर को रमा एकादशी है।

एक नज़र में

रमा एकादशीगुरुवार, 5 नवंबर
धनतेरसशुक्रवार, 6 नवंबर · पूजा 18:03–19:58
काली चौदस रात्रिशनिवार, 7 नवंबर
नरक चतुर्दशी स्नान + दीपावलीरविवार, 8 नवंबर · लक्ष्मी पूजा 17:55–19:51
गोवर्धन पूजामंगलवार, 10 नवंबर
भाई दूजबुधवार, 11 नवंबर

पूरा दीपोत्सव एक तालिका में

पाँच दिनों का यह पर्व इस बार सात दिनों में फैला है, क्योंकि तिथियाँ दिन के बीच में बदल रही हैं। नीचे हर दिन की तिथि, मुख्य अनुष्ठान और मुख्य समय (नई दिल्ली) एक साथ दिया गया है, ताकि घर में सबको एक ही उत्तर मिले।

दिनतिथिमुख्य अनुष्ठानमुख्य समय (नई दिल्ली)
गुरु, 5 नवंबरकृष्ण एकादशी (10:36 तक)रमा एकादशी व्रतपारण 6 नवंबर 06:36–08:47
शुक्र, 6 नवंबरत्रयोदशी (10:31 से)धनतेरस, धन्वंतरि जयंती, यम दीपम, शुक्र प्रदोषपूजा 18:03–19:58; यम दीपम 17:32–20:09
शनि, 7 नवंबरचतुर्दशी (10:48 से)काली चौदस, रात्रि हनुमान पूजा, चतुर्दशी दीपदानप्रदोष 17:31–20:09; निशीथ 23:38–00:31
रवि, 8 नवंबरचतुर्दशी भोर में, अमावस्या 11:28 सेनरक चतुर्दशी अभ्यंग स्नान + दीपावली लक्ष्मी पूजास्नान 05:36–06:38; पूजा 17:55–19:51
सोम, 9 नवंबरअमावस्या (12:32 तक)स्नान-दान, पितरों के निमित्त दानअमावस्या 12:32 तक
मंगल, 10 नवंबरशुक्ल प्रतिपदा (14:00 तक)गोवर्धन पूजा, अन्नकूटप्रातः पूजा 06:39–08:49; राहुकाल 14:47–16:08 टालें
बुध, 11 नवंबरद्वितीया (15:53 तक)भाई दूज, यम द्वितीयातिलक (अपराह्न) 13:09–15:19; राहुकाल 12:05–13:26 टालें

समय भारतीय मानक समय में, नई दिल्ली के लिए। अपने शहर के लिए सम्बन्धित पर्व पृष्ठ देखें।

इस बार नरक चतुर्दशी और दीपावली एक ही दिन क्यों

यह इस वर्ष का सबसे बड़ा प्रश्न है। चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को 10:48 पर आरम्भ होकर 8 नवंबर को 11:28 तक रहती है। नरक चतुर्दशी का मुख्य कर्म अभ्यंग स्नान है, और धर्मशास्त्र के अनुसार यह उस भोर में होता है जब सूर्योदय से पहले, चन्द्रोदय-अरुणोदय काल में चतुर्दशी विद्यमान हो। 7 नवंबर की भोर में तो त्रयोदशी थी, इसलिए स्नान 8 नवंबर की भोर (05:36 से 06:38 तक) में बनता है।

उसी 8 नवंबर को 11:28 से अमावस्या आरम्भ हो जाती है और संध्या का पूरा प्रदोष काल अमावस्या में रहता है, जो दीपावली की शर्त है। इसलिए सुबह रूप चौदस का स्नान, शाम को लक्ष्मी पूजा — दोनों रविवार 8 नवंबर को। जिस संध्या और रात में चतुर्दशी है, वह 7 नवंबर है, इसलिए काली चौदस और चतुर्दशी के दीपदान की रात्रि-परम्पराएँ 7 नवंबर को निभाई जाएँगी।

5 नवंबर: रमा एकादशी

एकादशी 4 नवंबर 11:03 पर आरम्भ होती है, पर व्रत सूर्योदय की तिथि से माना जाता है, इसलिए रमा एकादशी का व्रत गुरुवार 5 नवंबर को है। रमा माँ लक्ष्मी का ही नाम है, इसलिए इस दिन भगवान विष्णु के साथ माँ लक्ष्मी की पूजा होती है — दीपोत्सव का पहला दीप मानो यहीं से जलता है। पारण शुक्रवार 6 नवंबर को 06:36 से 08:47 के बीच करें। निर्जल व्रत गर्भावस्था, बीमारी या नियमित दवा में डॉक्टर की सलाह से ही रखें।

6 नवंबर: धनतेरस, धन्वंतरि जयंती, यम दीपम और शुक्र प्रदोष

त्रयोदशी 6 नवंबर 10:31 से आरम्भ होती है और प्रदोष काल 17:32–20:09 पूरी तरह त्रयोदशी में है। भगवान धन्वंतरि, माँ लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा का श्रेष्ठ समय 18:03–19:58 (प्रदोष और वृषभ लग्न) है। इसी प्रदोष में घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर यमराज जी के नाम का दीपक जलाया जाता है। शुक्रवार और प्रदोष-व्यापिनी त्रयोदशी साथ होने से इसी दिन शुक्र प्रदोष व्रत भी है, जिसमें संध्या को भगवान शिव की पूजा होती है।

खरीदारी के लिए दिन के शुभ चौघड़िया: लाभ 07:58–09:20, अमृत 09:20–10:42, शुभ 12:04–13:26, और रात में लाभ 20:48–22:26। राहुकाल 10:42–12:04 टालें। ध्यान रहे, 10:31 से पहले की सुबह अभी द्वादशी है।

7 नवंबर की रात: काली चौदस और श्री हनुमान जी की पूजा

गुजरात और पश्चिम भारत में यह रात काली चौदस कहलाती है, जब माँ काली और श्री हनुमान जी की पूजा से घर की नकारात्मकता दूर करने की परम्परा है। उत्तर भारत की कुछ परम्पराएँ भी इस चतुर्दशी की रात श्री हनुमान जी का विशेष पूजन करती हैं। प्रदोष 17:31–20:09 में दीपदान और निशीथ काल 23:38–00:31 में साधना-जप किया जाता है। राहुकाल 09:21–10:42 है।

8 नवंबर: रूप चौदस का स्नान और दीपावली

भोर में उबटन और तिल के तेल से अभ्यंग स्नान (05:36–06:38), दिन में घर की अंतिम सजावट, और संध्या को लक्ष्मी पूजा 17:55–19:51। मुहूर्त छूट जाए तो अमृत चौघड़िया 19:09–20:48 तक अच्छा है, और साधना के लिए निशीथ काल 23:38–00:31। बंगाल में इसी रात काली पूजा होती है।

अपने शहर का लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, पूरी विधि और आरती एक ही स्थान पर देखें। दीपावली पृष्ठ

9 नवंबर: अमावस्या का स्नान-दान

अमावस्या 12:32 तक रहती है। कई स्थानों पर इस दिन पवित्र नदी या घर पर स्नान, पितरों के निमित्त दान और ज़रूरतमंदों को भोजन कराने की परम्परा है। घाट पर स्नान करें तो किनारे के पास ही रहें, बच्चों और बुज़ुर्गों का हाथ थामे रखें।

10 नवंबर: गोवर्धन पूजा और अन्नकूट

प्रतिपदा 9 नवंबर 12:32 से 10 नवंबर 14:00 तक है और 10 नवंबर का सूर्योदय (06:39) प्रतिपदा में है। भगवान श्री कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की स्मृति में गोबर से गोवर्धन बनाकर पूजा और अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। राहुकाल 14:47–16:08 टालें; पूजा प्रतिपदा रहते, 14:00 से पहले करना अच्छा है।

11 नवंबर: भाई दूज, यम द्वितीया

द्वितीया 10 नवंबर 14:00 से 11 नवंबर 15:53 तक है, इसलिए भाई दूज बुधवार 11 नवंबर को है। कथा है कि इसी दिन यमुना जी ने अपने भाई यमराज जी को घर बुलाकर तिलक किया और भोजन कराया था। बहनें भाई को तिलक कर उसकी दीर्घायु की कामना करती हैं। राहुकाल 12:05–13:26 टालें और तिलक द्वितीया रहते कर लें।

हर दिन का सूर्योदय, राहुकाल और चौघड़िया अपने शहर के लिए देखना हो तो पंचांग खोलें। आज का पंचांग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीपावली 2026 कब है?

रविवार, 8 नवंबर 2026 को। नई दिल्ली में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त 17:55 से 19:51 तक है।

छोटी दिवाली 2026 कब है, 7 या 8 नवंबर?

दोनों का अपना भाग है। चतुर्दशी की संध्या और रात 7 नवंबर को है, इसलिए काली चौदस और चतुर्दशी का दीपदान 7 नवंबर को होगा। नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की भोर में है, उसी दिन शाम को दीपावली है।

धनतेरस 2026 पर खरीदारी का शुभ समय क्या है?

शुक्रवार 6 नवंबर को लाभ 07:58–09:20, अमृत 09:20–10:42, शुभ 12:04–13:26 और रात में लाभ 20:48–22:26 (नई दिल्ली)। राहुकाल 10:42–12:04 से बचें। पूजा का समय 18:03–19:58 है।

गोवर्धन पूजा 9 को है या 10 नवंबर को?

मंगलवार 10 नवंबर को। 9 नवंबर को सूर्योदय पर अमावस्या है, जो 12:32 तक रहती है; प्रतिपदा का सूर्योदय 10 नवंबर को मिलता है।

भाई दूज 2026 किस दिन है?

बुधवार, 11 नवंबर 2026 को। द्वितीया तिथि 15:53 तक है, इसलिए तिलक इससे पहले कर लेना अच्छा है; राहुकाल 12:05–13:26 टालें।

संदर्भ

निर्णयसिन्धु · धर्मसिन्धु · स्कन्द पुराण (कार्तिक माहात्म्य) · आरती संग्रह पंचांग-गणना (नई दिल्ली)

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