संकटमोचन हनुमान अष्टक

हनुमान जी · Hanuman · मंत्र

संकटमोचन हनुमान अष्टक — हनुमान जी

संकटमोचन हनुमान अष्टक के बोल

प्रभु श्रीराम दूत अतुल बलधामा।
अंजनि पुत्र पवन सुत नामा॥

महाबीर विक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥

भूत पिशाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥

नासे रोग हरे सब पीरा।
जपत निरन्तर हनुमत बीरा॥

संकट से हनुमान छुड़ावे।
मन क्रम वचन ध्यान जो लावे॥

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिनके काज सकल तुम साजा॥

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेई सर्व सुख करई॥

संकट कटे मिटे सब पीरा।
जो सुमिरे हनुमत बलबीरा॥

— स्रोत: गोस्वामी तुलसीदास कृत — हनुमान चालीसा परम्परा

संकटमोचन हनुमान अष्टक — कब पढ़ें

हनुमान जी की आराधना का दिन मंगलवार है — अगला मंगलवार, 13 अक्टूबर को।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।

मंगल की वर्तमान स्थिति

मंगल इस समय कर्क राशि में हैं, और 12 नव॰ 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।

ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।

हनुमान जी मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; हनुमान जी की आराधना का वार मंगलवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।

माला: **लाल चन्दन अथवा रुद्राक्ष** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

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