हनुमान अष्टकम्
हनुमान जी · Hanuman · स्तोत्र
हनुमान अष्टकम् के बोल
बाल समय रवि भक्षी लियो तब तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को यह संकट काहु सों जात न टारो॥
देवन आनि करी बिनती तब छाड़ि दियो रवि कष्ट निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥१॥
बलि की बाँध लियो महाबाहु लियो बड़ रूप सोमित्र पटायो।
लंकिनि भई खल मर्दन की गति नारद को भी पंथ बतायो॥
सब पर राम तपस्वी को प्रिय जो नहिं जाने वो रहत दुखारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥२॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥
जय महावीर जय अञ्जनीसुत।
लंकादहन जय रामके भक्त॥
हनुमान की महिमा।
तुलसीदास ने वर्णन किया।
राम लखन सीता के संग।
सदा रहो मम हृदय संग॥
— स्रोत: गोस्वामी तुलसीदास — संकटमोचन हनुमानाष्टक
हनुमान अष्टकम् — कब पढ़ें
आज मंगलवार है — हनुमान जी की आराधना का दिन। आज का जप विशेष फलदायी माना गया है।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
मंगल की वर्तमान स्थिति
मंगल इस समय मिथुन राशि में हैं, और 18 सित॰ 2026 को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे।
ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।
हनुमान जी मंत्र जप की विधि
जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; हनुमान जी की आराधना का वार मंगलवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
माला: **लाल चन्दन अथवा रुद्राक्ष** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।
जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।