बन्दे सन्तं श्रीहनुमन्ते रामदासममलं बलवन्तम्

हनुमान जी · Hanuman · स्तोत्र

बन्दे सन्तं श्रीहनुमन्ते रामदासममलं बलवन्तम् — हनुमान जी

बन्दे सन्तं श्रीहनुमन्ते रामदासममलं बलवन्तम् के बोल

बन्दे सन्तं श्रीहनुमन्ते रामदासममलं बलवन्तम्।
रामकथामृतमधु निपिबन्तं परमप्रेमभरेण नटन्तम्॥ १॥
प्रेमरुद्धगलमश्रुवहन्तं पुलकाञ्चितवपुषा विलसन्तम्।
सर्व राममयं पश्यन्तं राघवनाम सदा प्रजपन्तम्॥ २॥
कदाचिदानन्देन हसन्तं क्वचित् कदाचिदपि प्ररुदन्तम्।
सद्भक्तिपथं समुपदिशन्तं विह्वलयन्तं प्रति सुखयन्तम्॥ ३॥

बन्दे सन्तं श्रीहनुमन्ते रामदासममलं बलवन्तम् — कब पढ़ें

आज मंगलवार है — हनुमान जी की आराधना का दिन। आज का जप विशेष फलदायी माना गया है।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।

मंगल की वर्तमान स्थिति

मंगल इस समय मिथुन राशि में हैं, और 18 सित॰ 2026 को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे।

ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।

हनुमान जी मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; हनुमान जी की आराधना का वार मंगलवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।

माला: **लाल चन्दन अथवा रुद्राक्ष** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

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