श्री हनुमान गायत्री मन्त्र (पञ्चक — पाँच पाठ)

हनुमान जी · Hanuman · मंत्र

श्री हनुमान गायत्री मन्त्र (पञ्चक — पाँच पाठ) — हनुमान जी

श्री हनुमान गायत्री मन्त्र (पञ्चक — पाँच पाठ) के बोल

॥ श्री हनुमान गायत्री मन्त्र (पञ्चक — पाँच प्रचलित पाठ) ॥

१. ॐ आञ्जनेयाय विद्महे, वायुपुत्राय धीमहि।
तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्॥

२. ॐ वायुपुत्राय विद्महे, रामदूताय धीमहि।
तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥

३. ॐ अञ्जनीसुताय विद्महे, वायुपुत्राय धीमहि।
तन्नो हनुमन्तः प्रचोदयात्॥

४. ॐ आञ्जनेयाय विद्महे, वायुपुत्राय धीमहि।
तन्नो मारुतिः प्रचोदयात्॥

५. ॐ रामदूताय विद्महे, कपिराजाय धीमहि।
तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्॥

⚠️ सभी पाठ प्रचलित एवं मान्य हैं। किसी एक को चुनकर नियमित जप करें।

श्री हनुमान गायत्री मन्त्र (पञ्चक — पाँच पाठ) — कब पढ़ें

आज मंगलवार है — हनुमान जी की आराधना का दिन। आज का जप विशेष फलदायी माना गया है।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।

मंगल की वर्तमान स्थिति

मंगल इस समय मिथुन राशि में हैं, और 18 सित॰ 2026 को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे।

ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।

हनुमान जी मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; हनुमान जी की आराधना का वार मंगलवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।

माला: **लाल चन्दन अथवा रुद्राक्ष** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

हनुमान जी के अन्य पाठ