श्री शिव ध्यान मन्त्र (ध्यायेन्नित्यं महेशं)
भगवान शिव · Shiva · मंत्र
श्री शिव ध्यान मन्त्र (ध्यायेन्नित्यं महेशं) के बोल
॥ श्री शिव ध्यान मन्त्र ॥
(शास्त्रीय / पूजा-पद्धति वाला)
ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं
रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।
पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं
विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥
अर्थ: चाँदी के पर्वत (कैलास) के समान श्वेत, सुन्दर चन्द्रमा को आभूषण रूप में
धारण करने वाले, रत्नों के आभूषणों से उज्ज्वल अंगों वाले, हाथों में परशु, मृग,
वरद व अभय मुद्रा धारण किए प्रसन्न, पद्मासन में बैठे, चारों ओर से देवगणों द्वारा
स्तुत, व्याघ्र-चर्म धारण किए, विश्व के आदि व बीज, समस्त भय हरने वाले,
पञ्चमुख व त्रिनेत्र महेश का मैं नित्य ध्यान करता हूँ।
श्री शिव ध्यान मन्त्र (ध्यायेन्नित्यं महेशं) — कब पढ़ें
भगवान शिव की आराधना का दिन सोमवार है — अगला सोमवार, 24 अगस्त को।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
अगला संबंधित व्रत
भगवान शिव से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल प्रदोष, मंगलवार, 25 अगस्त (7 दिन बाद)।
अन्य: मासिक शिवरात्रि — बुधवार, 9 सितंबर।
भगवान शिव मंत्र जप की विधि
जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; भगवान शिव की आराधना का वार सोमवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
माला: **रुद्राक्ष** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।
जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।