सूर्य द्वादश नाम
सूर्य देव · Surya · मंत्र
सूर्य द्वादश नाम के बोल
ॐ मित्राय नमः। ॐ मित्राय नमः।
ॐ रवये नमः। ॐ रवये नमः।
ॐ सूर्याय नमः। ॐ सूर्याय नमः।
ॐ भानवे नमः। ॐ भानवे नमः।
ॐ पूष्णे नमः। ॐ पूष्णे नमः।
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः। ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।
ॐ मरीचये नमः। ॐ मरीचये नमः।
ॐ आदित्याय नमः। ॐ आदित्याय नमः।
ॐ सवित्रे नमः। ॐ सवित्रे नमः।
ॐ अर्काय नमः। ॐ भास्कराय नमः॥
— स्रोत: परम्परागत — सूर्य द्वादश नाम
सूर्य द्वादश नाम — कब पढ़ें
सूर्य देव की आराधना का दिन रविवार है — अगला रविवार, 23 अगस्त को।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
सूर्य की वर्तमान स्थिति
सूर्य इस समय सिंह राशि में हैं, और 17 सित॰ 2026 को कन्या राशि में प्रवेश करेंगे।
ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।
सूर्य देव मंत्र जप की विधि
जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; सूर्य देव की आराधना का वार रविवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
माला: **रुद्राक्ष अथवा लाल चन्दन** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।
जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।