सूर्य मूल मन्त्र + अर्घ्य मन्त्र + सूर्य गायत्री
सूर्य देव · Surya · मंत्र
सूर्य मूल मन्त्र + अर्घ्य मन्त्र + सूर्य गायत्री के बोल
॥ सूर्य मूल मन्त्र ॥
ॐ सूर्याय नमः।
ॐ घृणिः सूर्याय नमः।
ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः श्रीं॥
॥ सूर्य अर्घ्य मन्त्र ॥
ॐ एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥
॥ सूर्य गायत्री मन्त्र (दो पाठ) ॥
ॐ आदित्याय विद्महे, प्रभाकराय धीमहि। तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्॥
ॐ सप्ततुरंगाय विद्महे, सहस्रकिरणाय धीमहि। तन्नो रविः प्रचोदयात्॥
सूर्य मूल मन्त्र + अर्घ्य मन्त्र + सूर्य गायत्री — कब पढ़ें
सूर्य देव की आराधना का दिन रविवार है — अगला रविवार, 23 अगस्त को।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
सूर्य की वर्तमान स्थिति
सूर्य इस समय सिंह राशि में हैं, और 17 सित॰ 2026 को कन्या राशि में प्रवेश करेंगे।
ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।
सूर्य देव मंत्र जप की विधि
जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; सूर्य देव की आराधना का वार रविवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
माला: **रुद्राक्ष अथवा लाल चन्दन** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।
जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।