अच्युताष्टकम् (शंकराचार्य)
भगवान विष्णु · Vishnu · स्तोत्र
अच्युताष्टकम् (शंकराचार्य) के बोल
अच्युतं केशवं रामनारायणं
कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं
जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे॥
अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं
माधवं श्रीधरं राधिकाराधितम्।
इन्दिरामन्दिरं चेतसा सुन्दरं
देवकीनन्दनं नन्दजं संभजे॥
विष्णवे जिष्णवे शङ्खिने चक्रिणे
रुक्मिणीरागिणे जानकीजानये।
वल्लवीवल्लभायार्चितायात्मने
कंसविध्वंसिने वंशिने ते नमः॥
कृष्ण गोविन्द हे राम नारायण
श्रीपते वासुदेवाजित श्रीनिधे।
अच्युतानन्त हे माधव त्राहि माम्
रामकृष्णाच्युतानन्त साहाय मे॥
कूर्मिणे शौरये योगनिद्राश्रिते
पद्मनाभाय नारायण सत्पते।
देवभूताय शम्भावनायाव्यय
भक्तिसुलभाय विष्णवे नमो नमः॥
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनामतत्तुल्यं रामनाम वरानने॥
श्रीराम राम रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनामतत्तुल्यं रामनाम वरानने।
इति श्रीशिव उवाच॥
— स्रोत: आदि शंकराचार्य कृत — अच्युताष्टकम्
अच्युताष्टकम् (शंकराचार्य) — कब पढ़ें
भगवान विष्णु की आराधना का दिन गुरुवार है — अगला गुरुवार, 20 अगस्त को।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
गुरु की वर्तमान स्थिति
गुरु इस समय कर्क राशि में हैं, और 31 अक्टू॰ 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।
ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।
अगला संबंधित व्रत
भगवान विष्णु से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।
भगवान विष्णु मंत्र जप की विधि
जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; भगवान विष्णु की आराधना का वार गुरुवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
माला: **तुलसी** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।
जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।