नारायण सूक्तम्

भगवान विष्णु · Vishnu · मंत्र

नारायण सूक्तम् — भगवान विष्णु

नारायण सूक्तम् के बोल

ॐ सहस्रशीर्षं देवं विश्वाक्षं विश्वशम्भुवम्।
विश्वं नारायणं देवं अक्षरं परमं पदम्॥

विश्वतः परमान्नित्यं विश्वं नारायणं हरिम्।
विश्वमेवेदं पुरुषस्तद्विश्वमुपजीवति॥

पतिं विश्वस्यात्मेश्वरं शाश्वतं शिवमच्युतम्।
नारायणं महाज्ञेयं विश्वात्मानं परायणम्॥

नारायण परो ज्योतिरात्मा नारायणः परः।
नारायण परं ब्रह्म तत्त्वं नारायणः परः॥

नारायण परो ध्याता ध्यानं नारायणः परः।
यच्च किञ्चित् जगत्सर्वं दृश्यते श्रूयतेऽपि वा।
अन्तर्बहिश्च तत्सर्वं व्याप्य नारायणः स्थितः॥

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

— स्रोत: तैत्तिरीय आरण्यक — नारायण सूक्त

नारायण सूक्तम् — कब पढ़ें

भगवान विष्णु की आराधना का दिन गुरुवार है — अगला गुरुवार, 20 अगस्त को।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।

गुरु की वर्तमान स्थिति

गुरु इस समय कर्क राशि में हैं, और 31 अक्टू॰ 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।

ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।

अगला संबंधित व्रत

भगवान विष्णु से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।

भगवान विष्णु मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; भगवान विष्णु की आराधना का वार गुरुवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।

माला: **तुलसी** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

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