गणेश सहस्रनाम (संक्षिप्त)
श्री गणेश · Ganesha · स्तोत्र
गणेश सहस्रनाम (संक्षिप्त) के बोल
ॐ विनायकाय नमः। ॐ विघ्नराजाय नमः।
ॐ गौरीपुत्राय नमः। ॐ गणेश्वराय नमः।
ॐ स्कन्दाग्रजाय नमः। ॐ अव्ययाय नमः।
ॐ पुताय नमः। ॐ दक्षाय नमः।
ॐ अध्यक्षाय नमः। ॐ द्विजप्रियाय नमः।
ॐ अग्निगर्भच्छिदे नमः। ॐ इन्द्रश्रीप्रदाय नमः।
ॐ वाणीप्रदाय नमः। ॐ अव्ययाय नमः।
ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः।
ॐ शर्वतनयाय नमः।
ॐ शर्वरीप्रियाय नमः।
ॐ सर्वात्मकाय नमः।
ॐ सृष्टिकर्त्रे नमः।
ॐ देवाय नमः।
ॐ अनेकार्चिताय नमः।
ॐ शिवाय नमः।
ॐ शुद्धाय नमः।
ॐ बुद्धिप्रियाय नमः।
ॐ शान्ताय नमः।
ॐ ब्रह्मचारिणे नमः।
ॐ गजाननाय नमः।
ॐ द्वैमातुराय नमः।
ॐ मुनिस्तुताय नमः।
ॐ श्रीगणेशाय नमः॥
— स्रोत: गणेश पुराण — गणेश सहस्रनाम
गणेश सहस्रनाम (संक्षिप्त) — कब पढ़ें
श्री गणेश की आराधना का दिन बुधवार है — अगला बुधवार, 19 अगस्त को।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
अगला संबंधित व्रत
श्री गणेश से जुड़ा अगला व्रत — संकष्टी चतुर्थी, सोमवार, 31 अगस्त (13 दिन बाद)।
अन्य: विनायक चतुर्थी — सोमवार, 14 सितंबर।
श्री गणेश मंत्र जप की विधि
जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; श्री गणेश की आराधना का वार बुधवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
माला: **रुद्राक्ष अथवा हल्दी** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।
जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।