हनुमान बाहुक (तुलसीदास)
हनुमान जी · Hanuman · स्तोत्र
हनुमान बाहुक (तुलसीदास) के बोल
बालसमय रबि भक्षी लियो। तब तीनहुँ लोक अँधेरो भयो।
नाना विधि बिनती सबन करी। तब छाड़े दिनकर कपि हरी॥
जोरि पानि बिनती करत हौं। राम राम रट नाम धरत हौं।
जय हनुमान असुर भय हारी। जय अंजनी पुत्र महाबली भारी॥
करहु कृपा जनि जानि अनाथा। मैं तुम्हार नाथ रघुनाथा।
पवनसुत बाहु पीर हरो। संकट काटि कृपा करो॥
सिंधु तरे बन्दर कटक संगा। राम काज कीनो अति उमंगा।
रावण मारि सिया सुधि लाए। राम काज सब सफल बनाए॥
जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।
जो शत बार पाठ कर कोई। छूटहिं बंदि महा सुख होई॥
— स्रोत: गोस्वामी तुलसीदास कृत — हनुमान बाहुक
हनुमान बाहुक (तुलसीदास) — कब पढ़ें
आज मंगलवार है — हनुमान जी की आराधना का दिन। आज का जप विशेष फलदायी माना गया है।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
मंगल की वर्तमान स्थिति
मंगल इस समय मिथुन राशि में हैं, और 18 सित॰ 2026 को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे।
ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।
हनुमान जी मंत्र जप की विधि
जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; हनुमान जी की आराधना का वार मंगलवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
माला: **लाल चन्दन अथवा रुद्राक्ष** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।
जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।