ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र (ब्रह्मपुराण)

श्री गणेश · Ganesha · स्तोत्र

ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र (ब्रह्मपुराण) — श्री गणेश

ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र (ब्रह्मपुराण) के बोल

ॐ स्मरामि देवदेवेशं वक्रतुण्डं महाबलम्।
षडक्षरं कृपासिन्धुं नमामि ऋणमुक्तये॥

सर्वेषामेव कार्याणां सिद्धिर्भवतु मे सदा।
पाशाङ्कुशधरं देवं प्रणमामि गणाधिपम्॥

एकदन्तं शूर्पकर्णं गजवक्त्रं चतुर्भुजम्।
पाशाङ्कुशधरं देवं ध्यायेत् सिद्धिविनायकम्॥

यं विश्वमूलमाद्यं देवाः सततमर्चयन्ति।
विघ्नराजमहं नौमि नमो गणपतये नमः॥

ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

इति ऋणहर्ता गणेश स्तोत्रम्।
य इदं पठेत् पुण्यं स सर्वर्णैर्विमुच्यते।
अन्ते विष्णोः परं धाम याति कर्म विशोधितः॥

— स्रोत: ब्रह्मपुराण — ऋणमोचन गणेश स्तोत्र

ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र (ब्रह्मपुराण) — कब पढ़ें

श्री गणेश की आराधना का दिन बुधवार है — अगला बुधवार, 19 अगस्त को।

जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।

अगला संबंधित व्रत

श्री गणेश से जुड़ा अगला व्रत — संकष्टी चतुर्थी, सोमवार, 31 अगस्त (13 दिन बाद)।

अन्य: विनायक चतुर्थी — सोमवार, 14 सितंबर।

श्री गणेश मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; श्री गणेश की आराधना का वार बुधवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।

माला: **रुद्राक्ष अथवा हल्दी** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

श्री गणेश के अन्य पाठ