श्रीबदरीनाथ-महिमा — तुहिन गिरिमधि परम सुखप्रद
भगवान विष्णु · Vishnu · स्तोत्र
श्रीबदरीनाथ-महिमा — तुहिन गिरिमधि परम सुखप्रद के बोल
तुहिन गिरिमधि परम सुखप्रद आश्रमं अतिशोभितम्।
जहँ बसत सब सुर मुकुटमणि श्रीबद्रीनाथ जगत्प्रभुम्॥ १॥
बहत सुरसरि-धार निर्मल अघसमूह निकन्दनम्।
सिद्ध-मुनि-सुर करत जय जय श्रीबद्रीनाथ जगत्प्रभुम्॥ २॥
चलत मंद सुगन्ध शीतल वायु, पुष्प सुशोभितम्।
शक्ति-शेष-महेश सुमिरत श्रीबद्रीनाथ जगत्प्रभुम्॥ ३॥
बदत सनकादिक महामुनि वेदवाक्य निरन्तरम्।
ब्रह्म-नारद करत स्तुति श्रीबद्रीनाथ जगत्प्रभुम्॥ ४॥
सकल जगदाधार व्यापक बहा अलख अनामयम्।
जगत व्याप्त अपार महिमा श्रीबद्रीनाथ जगत्प्रभुम्॥ ५॥
इन्द्र उद्धव चन्द्र रवि गन्धर्व सेवत तत्परम्।
करत कमला सतत सेवा श्रीबद्रीनाथ जगत्प्रभुम्॥ ६॥
योग साधत योगि निशिदिन ज्योति निरखत संततम्।
कृपा कीजै भक्तजन पर श्रीबद्रीनाथ जगत्प्रभुम्॥ ७॥
अज अनामय ईश गो-द्विजपालकं सुर वन्दितम्।
विश्वपालक असुर-घालक श्रीबद्रीनाथ जगत्प्रभुम्॥ ८॥
जपत निशिदिन नाम तव जो लहत भक्ति सुजीबनम्।
दासपर करु कृपा संतत श्रीबद्रीनाथ जगत्प्रभुम्॥ ९॥
श्रीबदरीनाथ-महिमा — तुहिन गिरिमधि परम सुखप्रद — कब पढ़ें
भगवान विष्णु की आराधना का दिन गुरुवार है — अगला गुरुवार, 20 अगस्त को।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
गुरु की वर्तमान स्थिति
गुरु इस समय कर्क राशि में हैं, और 31 अक्टू॰ 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।
ग्रह की स्थिति निरयन (लाहिरी) खगोलीय गणना से — यह प्रतिदिन बदलती है।
अगला संबंधित व्रत
भगवान विष्णु से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।
भगवान विष्णु मंत्र जप की विधि
जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है; भगवान विष्णु की आराधना का वार गुरुवार है, अतः उस दिन का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
माला: **तुलसी** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।
जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।