आरति जुगलकिसोरकी कीजै
भगवान कृष्ण · Krishna · आरती
आरति जुगलकिसोरकी कीजै के बोल
आरति जुगलकिसोरकी कीजै, तन मन धन न्योछावर कीजै॥
गौर स्याम मुख निरखन कीजै, प्रेम स्वरूप नयन भर पीजै।
रबि ससि कोटि बदनकी सोभा, ताहि देखि मेरो मन लोभा॥
मोर मुकुट कर मुरली सोहै, नटवर वेष निरख मन मोहै।
ओढ़ें पीत नील पट सारी, कुंजन ललना-लाल बिहारी॥
श्रीपुरुषोत्तम गिरिबरधारी, आरति करत सकल ब्रजनारी।
नँदनंदन बृषभानु-किसोरी, परमानँद प्रभु अबिचल जोरी॥
अगला संबंधित व्रत
भगवान कृष्ण से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।