गोविन्द दामोदर स्तोत्रम् (लघु पाठ)

भगवान कृष्ण · Krishna · स्तोत्र

गोविन्द दामोदर स्तोत्रम् (लघु पाठ) — भगवान कृष्ण

गोविन्द दामोदर स्तोत्रम् (लघु पाठ) के बोल

करारविन्देन पदारविन्दं
मुखारविन्दे विनिवेशयन्तम्।
वटस्य पत्रस्य पुटे शयानं
बालं मुकुन्दं मनसा स्मरामि॥१॥

श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे
हे नाथ नारायण वासुदेव।
जिह्वे पिबस्वामृतमेतदेव
गोविन्द दामोदर माधवेति॥२॥

विक्रेतुकामाखिलगोपकन्या
मुरारिपादार्पितचित्तवृत्तिः।
दध्यादिकं मोहवशादवोचद्
गोविन्द दामोदर माधवेति॥३॥

गृहे गृहे गोपवधूकदम्बाः
सर्वे मिलित्वा समवाप्य योगम्।
पुण्यानि नामानि पठन्ति नित्यं
गोविन्द दामोदर माधवेति॥४॥

सुखं शयाना निलये निजेऽपि
नामानि विष्णोः प्रवदन्ति मर्त्याः।
ते निश्चितं तन्मयतां व्रजन्ति
गोविन्द दामोदर माधवेति॥५॥

॥ लघु पाठ सम्पूर्ण ॥

अगला संबंधित व्रत

भगवान कृष्ण से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।

भगवान कृष्ण मंत्र जप की विधि

जप सामान्यतः **108 बार** — एक माला — किया जाता है। संकल्प लेकर नित्य एक माला करना, अथवा विशेष कामना हेतु 11, 21 अथवा 108 दिन तक नियमित जप करने का विधान है।

ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व) जप हेतु श्रेष्ठ काल है।

माला: **तुलसी** की माला इस जप हेतु उपयुक्त कही गई है। माला की मणियाँ अंगूठे व मध्यमा से फेरी जाती हैं, तर्जनी का स्पर्श वर्जित है, और सुमेरु (मुख्य मनका) लाँघा नहीं जाता — वहाँ से माला उलटकर अगली आवृत्ति आरम्भ की जाती है।

जप के समय पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख रखें, आसन पर बैठें, और उच्चारण शुद्ध व स्थिर रखें। मन भटके तो गिनती नहीं, स्मरण महत्वपूर्ण है।

भगवान कृष्ण के अन्य पाठ