बैठे कुंज-मंडपमें आइ
भगवान कृष्ण · Krishna · आरती
बैठे कुंज-मंडपमें आइ के बोल
बैठे कुंज-मंडपमें आइ।
रच्यो सवार सखी-ललितादिक, यह सोभा कछु बरनि न जाइ॥ १॥
दीपमालिका सुचिर बनाई घृत-परिपूरन ताइ।
धूप-दीप कर, फूल-माल धर, नाना व्यंजन सुभग कराइ॥ २॥
गावत मंगल-गीत सकल मिल, नँदनंदन पियदेव मनाइ।
बार आरती जुगल रूप पर, चतुर्भुजदास बारनें जाइ॥ ३॥
अगला संबंधित व्रत
भगवान कृष्ण से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।