जय काली कंकाली जय जग पालिनि
माँ काली · Kali · आरती
जय काली कंकाली जय जग पालिनि के बोल
जय काली कंकाली जय जग पालिनि।
जय दुर्गे जय माँ दुर्गे त्रिभुवन के व्यापिनि।
काली कंकाली जय जय॥
काले वर्ण की माँ दिगम्बरी।
मुण्डमाल धारे खड्गधारी।
शवासन पर नृत्य करती।
भक्तों की पीड़ा हरती॥
जय काली कंकाली जय जग पालिनि॥
रक्तबीज संहारिणी माँ।
चण्ड मुण्ड की नाशिनी माँ।
शुम्भ निशुम्भ मारिणी माँ।
जग की रक्षा करिणी माँ॥
जय काली कंकाली जय जग पालिनि।
जय दुर्गे जय माँ दुर्गे त्रिभुवन के व्यापिनि॥
— स्रोत: परम्परागत काली आरती
जय काली कंकाली जय जग पालिनि — कब पढ़ें
माँ काली की आराधना का दिन शनिवार है — अगला शनिवार, 22 अगस्त को।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग करें — एक माला अर्थात 108 जप।
अगला संबंधित व्रत
माँ काली से जुड़ा अगला व्रत — मासिक दुर्गाष्टमी, गुरुवार, 20 अगस्त (2 दिन बाद)।