श्री व्रजनन्दन जी की आरती (करत आरती नव-ब्रजनारी)

भगवान कृष्ण · Krishna · आरती

श्री व्रजनन्दन जी की आरती (करत आरती नव-ब्रजनारी) — भगवान कृष्ण

श्री व्रजनन्दन जी की आरती (करत आरती नव-ब्रजनारी) के बोल

॥ श्री व्रजनन्दन जी की आरती ॥

करत आरती नव-ब्रजनारी।
अगर कपूर सुगन्धित बूका,
बिबिध भाँति की साँझ सँवारी॥

घंटा झालर शंख नृसिंहा,
बिजै-घंट धुनि परम सुखारी।
बंसी बीन मृदंग तम्बूरा,
सहनाई बाजत है न्यारी॥

बरसत फूल गगन सों सुरगन,
देव-बधू नाचत दै तारी।
हरषत सखी करत न्योछावर,
"नारायण" होवैं बलिहारी॥

अगला संबंधित व्रत

भगवान कृष्ण से जुड़ा अगला व्रत — शुक्ल पक्ष एकादशी, रविवार, 23 अगस्त (5 दिन बाद)।

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