धनतेरस 2026 — शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
Dhanteras · कार्तिक मास · 28 दिन बाद
धनतेरस 2026 कब है?
धनतेरस 2026 में शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है — आज से 28 दिन बाद।
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी — धन्वंतरि जयंती; प्रदोष काल में दीपदान व धातु-क्रय की परम्परा।
धनतेरस का महत्व
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी — धन्वंतरि जयंती; प्रदोष काल में दीपदान व धातु-क्रय की परम्परा।
यह पर्व कार्तिक मास में पड़ता है। हिन्दू पर्व सौर तिथि पर नहीं, चन्द्र-तिथि पर तय होते हैं — इसीलिए हर वर्ष अंग्रेज़ी कैलेंडर में इनकी तारीख़ बदलती है। यहाँ दी गई तिथि खगोलीय गणना (लाहिरी अयनांश) से निकाली गई है, किसी सूची से नहीं।
धनतेरस 2026 — पूजा का शुभ समय
| सूर्योदय | 06:36 |
|---|---|
| सूर्यास्त | 17:32 |
| प्रदोष काल (पूजा व यम-दीपम) | 17:32 – 19:56 |
| खरीदारी के शुभ चौघड़िया | लाभ 07:58–09:20 · अमृत 09:20–10:42 · शुभ 12:04–13:26 · लाभ 20:48–22:26 |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:42 – 12:26 |
| ब्रह्म मुहूर्त | 05:00 – 05:48 |
| राहुकाल (टालें) | 10:42 – 12:04 |
समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर गणना किए गए हैं — अपने शहर का समय देखें। यह गणना खगोलीय है, किसी संग्रहीत सारणी से नहीं ली गई — और प्रचलित पंचांगों से मिलाकर जाँची गई है (गणना-सत्यापित)।
धनतेरस पूजा-विधि
- सायंकाल प्रदोष काल में धन्वंतरि व लक्ष्मी-कुबेर का पूजन करें।
- नई धातु (चाँदी/पीतल के बर्तन) या सोना खरीदकर घर लाएँ।
- मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर यम-दीप (आटे का दीपक) जलाएँ।
- 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' व धन्वंतरि मंत्र का जप करें।
- दीपदान कर परिवार की आरोग्य व समृद्धि की कामना करें।
धनतेरस पूजा सामग्री
नया बर्तन/धातु, आटे का यम-दीप, सरसों तेल, रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, बताशे
धनतेरस — क्या करें, क्या न करें
प्रदोष काल में यम-दीपक दक्षिण दिशा की ओर मुख करके घर के बाहर जलाया जाता है — यह अकाल-मृत्यु से रक्षा हेतु है। इसी संध्या धन्वंतरि-पूजन तथा नवीन धातु-क्रय की परम्परा है।
पूजा व मंत्र
धन्वंतरि-लक्ष्मी की आराधना इस पर्व का केंद्र है। मंत्र — ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः (108 बार जप)।
जप की गिनती हेतु ऑनलाइन जप-माला का उपयोग किया जा सकता है।
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धनतेरस की कथा
समुद्र-मंथन से जब चौदह रत्न निकले, तो कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि अमृत-कलश लिए प्रकट हुए — वैद्य-शास्त्र के आदि-देव। इसीलिए यह दिन आरोग्य का पर्व भी है और बर्तन या धातु खरीदने की परम्परा उसी कलश की स्मृति है। दूसरी कथा हेम नामक राजा के पुत्र की है, जिसकी विवाह के चौथे दिन मृत्यु का योग बताया गया था। उसकी नववधू ने उस रात्रि द्वार पर दीपों की पंक्ति सजाई, स्वर्ण-रत्न बिखेर दिए और कथा-गीत से जागरण किया; यमदूत उस प्रकाश में प्रवेश न कर सके। इसी से प्रदोष काल में दक्षिण दिशा की ओर यम-दीप जलाने की परम्परा चली।
धनतेरस — क्षेत्रीय परम्पराएँ
उत्तर व पश्चिम भारत में बर्तन, चाँदी व आभूषण की खरीद; दक्षिण में यह धन्वंतरि जयंती — आयुर्वेद दिवस के रूप में; महाराष्ट्र में वसुबारस (गौ-वत्स पूजन) से दीपोत्सव आरंभ होता है।
धनतेरस — आने वाले वर्षों की तिथियाँ
| 2025 | शनिवार, 18 अक्टूबर 2025 |
|---|---|
| 2026 | शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 |
| 2027 | बुधवार, 27 अक्टूबर 2027 |
| 2028 | सोमवार, 16 अक्टूबर 2028 |
| 2029 | रविवार, 4 नवंबर 2029 |