यम-दीपम 2026: धनतेरस पर यम दीपदान का समय, विधि, मंत्र और कथा
यम-दीपम 2026 में धनतेरस के दिन, शुक्रवार 6 नवंबर की संध्या को प्रदोष काल में जलाया जाएगा; नई दिल्ली में यह समय 17:32 से 20:09 तक है। यह दीपक यमराज जी के निमित्त घर के मुख्य द्वार के बाहर, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखा जाता है, और परम्परा में इसे परिवार की अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना माना गया है।
एक नज़र में
| तिथि | शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 (कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी) |
|---|---|
| समय (दिल्ली) | प्रदोष काल 17:32–20:09 |
| दिशा | मुख्य द्वार के बाहर, दक्षिण की ओर |
| दीपक | आटे या मिट्टी का चौमुखा, सरसों या तिल का तेल |
| नरक चतुर्दशी दीपदान | शनिवार 7 नवंबर की संध्या (चतुर्दशी) |
यम-दीपम क्या है और कब जलाएँ
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी की संध्या को यमराज जी के लिए किया जाने वाला दीपदान यम-दीपम या यम-दीपदान कहलाता है। यही त्रयोदशी धनतेरस भी है, इसलिए एक ही शाम घर के भीतर माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा होती है, और घर के बाहर यम देव के लिए दीपक जलता है। भीतर समृद्धि की प्रार्थना, बाहर रक्षा की प्रार्थना; यही इस संध्या का संतुलन है।
2026 में त्रयोदशी 6 नवंबर को 10:31 पर आरम्भ होकर 7 नवंबर 10:48 तक है। प्रदोष-व्यापिनी त्रयोदशी केवल 6 नवंबर की शाम को है, इसलिए यम-दीपम शुक्रवार 6 नवंबर को ही होगा। प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक माना गया है, और दीपदान इसी अवधि में करना उत्तम है।
शहरवार यम-दीपम का समय
| शहर | सूर्यास्त | यम-दीपम (प्रदोष काल) |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | 17:32 | 17:32–20:09 |
| मुंबई | 18:02 | 18:02–20:34 |
| कोलकाता | 16:56 | 16:56–19:29 |
| चेन्नई | 17:40 | 17:40–20:09 |
| बेंगलुरु | 17:51 | 17:51–20:20 |
| हैदराबाद | 17:42 | 17:42–20:13 |
| लखनऊ | 17:20 | 17:20–19:56 |
| जयपुर | 17:40 | 17:40–20:16 |
| पटना | 17:05 | 17:05–19:40 |
| अहमदाबाद | 17:58 | 17:58–20:32 |
| पुणे | 17:59 | 17:59–20:31 |
| भोपाल | 17:39 | 17:39–20:13 |
| वाराणसी | 17:14 | 17:14–19:49 |
| चंडीगढ़ | 17:31 | 17:31–20:09 |
| इंदौर | 17:46 | 17:46–20:19 |
शुक्रवार 6 नवंबर 2026, भारतीय मानक समय। अन्य नगरों में अपने सूर्यास्त से लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक। स्रोत: आरती संग्रह पंचांग-गणना।
व्यावहारिक क्रम यह रखें: सूर्यास्त के बाद पहले यम-दीपम जलाएँ, फिर भीतर आकर धनतेरस की लक्ष्मी-धन्वंतरि पूजा करें। दिल्ली में पूजा का स्थिर-लग्न मुहूर्त 18:03–19:58 है, इसलिए 17:32 से 18:03 के बीच का समय यम-दीपम के लिए बहुत सुविधाजनक है।
यम-दीपम क्यों जलाते हैं: राजा हेम के पुत्र की कथा
पुराण-परम्परा से जुड़ी एक प्रचलित कथा है, जिसके संस्करणों में राजा का नाम हेम या हिम मिलता है। राजा हेम के यहाँ पुत्र का जन्म हुआ। ज्योतिषियों ने बताया कि विवाह के चौथे दिन इस बालक की मृत्यु का योग है। दुखी राजा ने उसे ऐसे स्थान पर रखा जहाँ विवाह की सम्भावना ही न रहे, पर नियति से राजकुमार का विवाह हो गया, और चौथे दिन यमदूत उसके प्राण लेने आए।
नवविवाहिता का करुण विलाप सुनकर यमदूतों का हृदय भी द्रवित हुआ। उन्होंने यमराज जी से पूछा कि क्या अकाल मृत्यु से बचने का कोई उपाय है। यमराज जी ने कहा: जो व्यक्ति कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी की संध्या को मेरे नाम से दक्षिण दिशा की ओर दीपदान करेगा, उसके परिवार को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। कुछ लोक-संस्करणों में यह भी कहा जाता है कि राजकुमार की पत्नी ने उस रात द्वार पर दीपक और आभूषणों का प्रकाश करके जागरण किया, और सर्प-रूप में आए यम देव उस प्रकाश से लौट गए।
यम-दीपम की विधि
- दीपक: आटे या मिट्टी का चौमुखा (चार बत्तियों वाला) दीपक लें। चार दिशाओं की चार बत्तियाँ परिवार की चारों ओर से रक्षा का प्रतीक मानी जाती हैं।
- तेल: सरसों या तिल का तेल डालें। घी का दीपक भीतर की लक्ष्मी-पूजा के लिए रखें।
- आधार: मुख्य द्वार के बाहर थोड़ा अनाज (गेहूँ या चावल) की छोटी ढेरी बनाएँ और उस पर दीपक रखें।
- दिशा: दीपक की लौ और आपका मुख दक्षिण की ओर हो। दक्षिण यम देव की दिशा मानी गई है।
- पूजन: जल, रोली और अक्षत छिड़ककर दीपक जलाएँ, यम देव का स्मरण करें और नीचे दिया मंत्र बोलें, या केवल हाथ जोड़कर परिवार की रक्षा की प्रार्थना करें।
- पीछे न देखें: लोक-मान्यता है कि दीपक रखकर बिना पीछे मुड़े भीतर आ जाएँ।
- दीपक जलने दें: कुछ परिवारों में दीपक घर के किसी बड़े सदस्य द्वारा जलाया जाता है। अपनी पारिवारिक रीति मानें।
मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥त्रयोदशी के दिन किए गए इस दीपदान से मृत्यु, पाश और दण्ड, काल तथा अपनी पत्नी श्यामा सहित सूर्य-पुत्र यम देव मुझ पर प्रसन्न हों।
— प्रचलित यम-दीपदान मंत्र (पद्म पुराण, उत्तर खण्ड की परम्परा; कुछ प्रतियों में पाठ-भेद)
इस मंत्र के कुछ अलग-अलग पाठ मिलते हैं, जैसे दण्डपाशाभ्यां या पाशहस्तेन। ऊपर दिया रूप सबसे अधिक प्रचलित है। यदि उच्चारण कठिन लगे तो भाव से की गई सरल प्रार्थना भी पूर्ण है।
यम-दीपम और नरक चतुर्दशी के दीपदान में अंतर
दोनों दीपदान यम देव से जुड़े हैं, पर तिथि और उद्देश्य अलग हैं। 2026 में ये अलग-अलग दिन पड़ रहे हैं, इसलिए यह अंतर समझना उपयोगी है।
| यम-दीपम (धनतेरस) | नरक चतुर्दशी दीपदान | |
|---|---|---|
| तिथि | कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी | कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी |
| 2026 में | शुक्रवार 6 नवंबर, प्रदोष काल | शनिवार 7 नवंबर की संध्या (चतुर्दशी) |
| दिल्ली में समय | 17:32–20:09 | प्रदोष 17:31–20:09 |
| मुख्य भाव | परिवार की अकाल मृत्यु से रक्षा | नरक-भय निवारण, घर के कोनों तक प्रकाश |
| दीपक | एक चौमुखा दीपक, द्वार के बाहर दक्षिण | प्रायः अनेक दीपक, घर के कोनों और द्वार पर |
2026 में नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान रविवार 8 नवंबर की भोर में, दीपावली के ही दिन है।
ध्यान दें: इस वर्ष चतुर्दशी 7 नवंबर 10:48 से 8 नवंबर 11:28 तक है। चतुर्दशी वाली संध्या 7 नवंबर की है, इसलिए छोटी दीपावली का दीपदान 7 नवंबर की शाम को होगा, जबकि सूर्योदय-व्यापिनी चतुर्दशी के कारण अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की भोर में, चन्द्रोदय (05:36) से सूर्योदय 06:38 तक होगा।
धनतेरस की संपूर्ण पूजा विधि और शहरवार लक्ष्मी-धन्वंतरि पूजा मुहूर्त एक ही पृष्ठ पर देखें। धनतेरस पूजा समय
यम-दीपम से जुड़ी आम भूलें
- 7 नवंबर को यम-दीपम मान लेना: त्रयोदशी की प्रदोष-संध्या केवल 6 नवंबर को है।
- दीपक घर के भीतर रखना: यह द्वार के बाहर रखा जाता है।
- दिशा उत्तर या पूर्व रखना: यम-दीपम की दिशा दक्षिण है।
- इसे अशुभ मानकर डरना: यह भय का नहीं, रक्षा और आदर का अनुष्ठान है।
- लक्ष्मी-पूजा के घी के दीपक को ही यम-दीपम समझ लेना: दोनों अलग हैं।
दीपदान के बाद कुछ क्षण शांत बैठकर ॐ नमः शिवाय या अपने इष्ट-मंत्र का जप करना चाहें, तो जप-माला सहायक होगी। जप-माला खोलें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यम-दीपम 2026 कब है?
यम-दीपम धनतेरस के दिन, शुक्रवार 6 नवंबर 2026 को है। नई दिल्ली में प्रदोष काल 17:32 से 20:09 तक है, इसी समय दीपदान करें।
यमराज जी का दीपक किस दिशा में रखें?
घर के मुख्य द्वार के बाहर, दीपक की लौ दक्षिण दिशा की ओर रखें। दक्षिण यम देव की दिशा मानी गई है।
यम-दीपम में कौन-सा तेल और दीपक लें?
आटे या मिट्टी का चौमुखा दीपक और सरसों या तिल का तेल परम्परा में प्रचलित है। दीपक को अनाज की छोटी ढेरी पर रखा जाता है।
यम-दीपम क्यों जलाया जाता है?
पुराण-परम्परा की कथा के अनुसार यमराज जी ने स्वयं कहा कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को उनके नाम दीपदान करने वाले परिवार को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। यह परिवार की रक्षा की प्रार्थना है।
यम-दीपम और छोटी दीपावली का दीपदान एक ही है?
नहीं। यम-दीपम त्रयोदशी (6 नवंबर) को होता है, और नरक चतुर्दशी का दीपदान चतुर्दशी की संध्या, 2026 में शनिवार 7 नवंबर को। अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की भोर में है।
संदर्भ
पद्म पुराण (उत्तर खण्ड) · स्कन्द पुराण · निर्णयसिन्धु · धर्मसिन्धु · आरती संग्रह पंचांग-गणना (नई दिल्ली)
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